वाराणसी: दूरसंचार विभाग की अनुसंधान एवं विकास इकाई सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने वाराणसी स्थित आईआईटी (बीएचयू) में अपना छठा उत्कृष्टता केंद्र बनाया है। इसका मकसद अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों में अनुसंधान को आगे बढ़ाना है।
दूरसंचार मंत्रालय के शुक्रवार के बयान के मुताबिक सी-डॉट और आईआईटी (बीएचयू) ने साझा अनुसंधान, तकनीक विकास और क्षमता निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह केंद्र 5जी एडवांस्ड और 6जी तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संचार प्रणाली, क्वांटम और पोस्ट-क्वांटम संचार, साइबर सुरक्षा तथा उन्नत वायरलेस नेटवर्क पर ध्यान देगा।
अनुसंधान क्षेत्रों में बहुत बड़े पैमाने की मल्टीपल-इनपुट मल्टीपल-आउटपुट (एमआईएमओ) प्रणाली, एकीकृत संवेदन और संचार, तथा एआई-नेटिव संचार नेटवर्क और उपकरण भी शामिल हैं।
इस साझेदारी का उद्देश्य अकादमिक अनुसंधान को वास्तविक दूरसंचार जरूरतों से जोड़ना है। इसमें शोधकर्ता, शिक्षक, छात्र और सी-डॉट के तकनीक विशेषज्ञ एक साथ काम करेंगे।
समझौते पर सी-डॉट के कार्यकारी उपाध्यक्ष पंकज कुमार दलेला और आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए। इसके बाद केंद्र का उद्घाटन हुआ।
"यह उत्कृष्टता केंद्र सिर्फ अनुसंधान मंच नहीं, बल्कि भारत की भावी तकनीक क्षमताओं में निवेश है," सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकुमार उपाध्याय ने कहा। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी का संचार एआई, क्वांटम तकनीक और बुद्धिमान नेटवर्क की प्रगति से तय होगा।
प्रोफेसर पात्रा ने कहा, "सी-डॉट के साथ यह साझेदारी अकादमिक अनुसंधान को प्रभावी तकनीकी समाधानों में बदलने का मजबूत मंच देगी।"
इस केंद्र से सी-डॉट के देशभर के उत्कृष्टता केंद्रों की संख्या छह हो गई है। आईआईटी कानपुर, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी रुड़की, आईआईटी हैदराबाद और आईआईएससी बेंगलुरु के साथ पहले से सहयोग है।