मुंबई: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली लंबे समय से अटके व्यापार सौदे को अंतिम रूप देने के करीब हैं. मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बैठक हुई.
'हम बहुत, बहुत करीब हैं. इतने करीब कि बस सौदे पर हस्ताक्षर बाकी है,' ऐसा रुबियो ने पत्रकारों से कहा. 'कुछ थोड़े मुद्दे निपटाने बाकी हैं,' उन्होंने कहा.
दोनों पक्षों की बातचीत मुश्किल हालात में चल रही है. अगस्त 2025 में बातचीत टूटने के बाद वॉशिंगटन ने ज्यादातर भारतीय सामानों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाए थे. फरवरी में तय ढांचे में दर 18 फीसदी कर दी गई, लेकिन उसके बाद बातचीत ठंडी पड़ गई. भारत ने कहा है कि उसकी अंतिम टैरिफ दर प्रतिस्पर्धी निर्माता देशों जैसी होनी चाहिए.
जयशंकर ने कहा कि बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और रक्षा तथा क्षेत्रीय घटनाक्रम शामिल रहे. रुबियो और जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ त्रिपक्षीय बैठक भी की; क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा हुई.
पांच महीनों में भारत की यह रुबियो की दूसरी यात्रा है. रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद और वॉशिंगटन के दबाव के बीच नई दिल्ली संतुलन बना रही है. भारत ने कहा है कि वह आपूर्तिकर्ताओं को विविध बनाते हुए आयात बढ़ाएगा.
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, बुधवार को रुबियो गुजरात के जामनगर जाएंगे और रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी परिसर देखकर कारोबारियों से मुलाकात करेंगे.
वॉशिंगटन रवाना होने से पहले रुबियो ने कहा था कि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों को स्वेच्छा से विविध बनाया है, लेकिन रूस से अब भी बड़ी मात्रा में ऊर्जा लेता है, क्योंकि एक दिन में दिशा बदलना आसान नहीं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि बातचीत 'प्लेटो' हो गई है, जबकि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले हफ्ते कहा था कि सौदे की पहली किस्त अंतिम चरण में है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित जामनगर परिसर को दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी परिसर बताया जाता है.