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महाराष्ट्र के दूर-दराज इलाकों के युवाओं के लिए विदेश में करियर के रास्ते खुले

महाराष्ट्र 'ग्लोबल स्किल्स मोबिलिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (GSMAI) के साथ समझौता करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य की 'महिमा' पहल से दूर-दराज के युवाओं को वैश्विक कौशल, विदेशी भाषा प्रशिक्षण और विदेश में सीधे रोजगार के मौके मिलेंगे।

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महाराष्ट्र की 'महिमा' पहल: विदेश में रोजगार के लिए कौशल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र के दूर-दराज गांवों के होनहार युवाओं की आंखों में अब सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समंदर पार अपनी काबिलियत साबित करने का सपना पलने लगा है। इन सपनों को पंख देने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। वैश्विक स्तर पर कुशल कामगारों की बढ़ती मांग को देखते हुए महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने 'ग्लोबल स्किल्स मोबिलिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (GSMAI) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया है।

इस अहम साझेदारी और राज्य सरकार की विशेष पहल 'महिमा' (MAHIMA) से महाराष्ट्र के युवाओं को वैश्विक कौशल, विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधे रोजगार के अवसर मिलेंगे।

"दुर्गम इलाकों के युवाओं में भी दुनिया में कहीं भी करियर बनाने का आत्मविश्वास होना चाहिए": मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस ऐतिहासिक समझौते पर अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा:

"महाराष्ट्र के बेहद दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के युवाओं में अपार प्रतिभा और मेहनत करने का जज्बा है। दुनिया के किसी भी विकसित देश में आत्मविश्वास के साथ करियर बनाने की ताकत उनमें आए, यही हमारा लक्ष्य है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल, आर्थिक मदद और संस्थागत सहयोग देने में सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी रहेगी। वैश्विक रोजगार के अवसर सिर्फ बड़े शहरों के चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचें, इसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं।"

नई दिल्ली में 'जीएसएमएआई' की औपचारिक स्थापना नई दिल्ली के 'आईटीसी मौर्या' में 12 अक्टूबर को 'ग्लोबल स्किल्स मोबिलिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (जीएसएमएआई) की आधिकारिक स्थापना हुई। वैश्विक कार्यबल गतिशीलता (Global Workforce Mobility) में भारत की साख बढ़ाने के लिए 17 संस्थापक संस्थाएं, केंद्र और राज्य सरकारें, उद्योगपति और कई देशों के राजनयिक प्रतिनिधि एक मंच पर आए।

लोगो और वेबसाइट का अनावरण: भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 'जीएसएमएआई' का लोगो और वेबसाइट लॉन्च की। उन्होंने साफ किया कि युवाओं के इस प्रवास को सिर्फ मजदूरों के स्थानांतरण के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल कर भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान देने का बड़ा मौका है।

उद्योग जगत की प्रतिबद्धता: GSMAI के संस्थापक अध्यक्ष अजय खन्ना ने अस्थायी समझौतों के बजाय मजबूत संस्थागत ढांचे और भरोसेमंदी को प्राथमिकता देने का संकल्प जताया।

अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति: इस समारोह में डेनमार्क के राजदूत रासमुस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेनसन, जर्मनी के उप-राजदूत जॉर्ज एन्ज़वाइलर, इटली की उप-प्रमुख ऑरोरा रुसी, संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष सांसद शशांक मणि, महाराष्ट्र सरकार की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा और ओडिशा के सचिव भूपेंद्र सिंह पूनिया सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि मौजूद थे।

कौशल को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय दिशा: कौशल मंत्री मंगलप्रभात लोढा कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा:

"मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र कौशल विकास में देश का नेतृत्व कर रहा है। इस समझौते से राज्य की कौशल विकास व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत के बीच का रिश्ता और मजबूत होगा। महाराष्ट्र का युवा सिर्फ अंतरराष्ट्रीय नौकरियां नहीं पाएगा, बल्कि अपनी बुद्धिमत्ता और मेहनत से देश का मान दुनिया में ऊंचा करेगा।"

'महिमा': विदेश में रोजगार की नई सुबह कौशल विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने 'महिमा' (महाराष्ट्र व्यापक आंतरराष्ट्रीय गतिशीलता आणि क्षमता संस्था), 'सेक्शन 8' कंपनी की भूमिका के बारे में जानकारी दी:

मांग के अनुसार प्रशिक्षण: दुनिया के विभिन्न देशों के खास क्षेत्रों में मानव संसाधन की मांग पहचानकर जिला स्तर पर युवाओं को प्रशिक्षण और परामर्श दिया जा रहा है।

व्यापक नेटवर्क: महाराष्ट्र में फिलहाल 1,000 से अधिक आईटीआई और 1,800 से अधिक तकनीकी शिक्षा संस्थान काम कर रहे हैं। इसी मजबूत आधार पर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकने वाला कुशल युवा वर्ग तैयार किया जा रहा है।

सुरक्षित और भरोसेमंद रास्ता: 'महिमा' भाषा ज्ञान, सांस्कृतिक समझ और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सीधे तालमेल, इन तीन आधारों पर काम कर रही है।

राज्य के इस दूरगामी कदम से युवाओं को वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाने का बड़ा मौका मिलेगा।