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छात्रसंघ के लिए दो दशक का इंतजार खत्म; जामिया ने चुनाव कराने को कहा हां

आंदोलन के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया ने छात्रसंघ बहाल कर चुनाव कराने की मंजूरी दी। 15 मई 2027 तक संविधान मंजूर करने की समय-सीमा; अगले सत्र से छह हफ्ते के भीतर चुनाव। अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस। पांच अनशनकारियों ने अनशन तोड़ा।

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नई दिल्ली: करीब दो दशक बाद जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रसंघ फिर खड़ा होगा। हफ्ते भर चले आंदोलन के बाद प्रशासन ने देर रात आदेश जारी कर चुनाव कराने की मंजूरी दे दी।

आदेश के मुताबिक छात्रसंघ के संविधान को मंजूर और लागू करने की आखिरी तारीख 15 मई 2027 है। अगला शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह हफ्ते के भीतर चुनाव कराना होगा। सत्र 15 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है।

आंदोलन से जुड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन, परिसर से बाहर निकालने और प्रवेश पर रोक के आदेश भी वापस लिए गए हैं।

फैसले से परिसर में जश्न छा गया। एक हजार से ज्यादा छात्रों ने जीत का मार्च निकाला और पांच अनशनकारियों ने भूख हड़ताल खत्म कर दी।

छात्रों की मांग सीधी थी — छात्रसंघ बहाल हो और चुनाव हों। आंदोलन हफ्तों तक चला, अनशन हुआ और प्रशासन पर दबाव बढ़ता गया।

जामिया का छात्रसंघ लंबे समय से निष्क्रिय था। इससे छात्रों की शिकायतों, पाठ्यक्रम से जुड़ी मांगों और परिसर के मुद्दों को रखने के लिए कोई प्रतिनिधि मंच नहीं था।

अब संविधान की मंजूरी से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक का रास्ता प्रशासन ने तय कर दिया है। छात्रसंघ की कार्यकारिणी की बनावट और चुनाव का तरीका संविधान में तय होगा।

जारी आदेश के मुताबिक संविधान मंजूर कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की रहेगी और इसमें छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।

परिसर में अब अगले सत्र की तैयारी ने रफ्तार पकड़ ली है।

छात्रसंघ न होने से छात्रों के पास प्रशासन के सामने सामूहिक आवाज उठाने का ठोस मंच नहीं था। अब वह जगह भरने वाली है। संविधान मंजूर होने तक चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होगी, इसलिए अगले सत्र की शुरुआत में मतदान होने की उम्मीद है।

आंदोलन के दौरान छात्रों ने लगातार अपनी मांग रखी और आखिरकार प्रशासन को लिखित आदेश जारी करना पड़ा।