बेंगलुरु: रास्ता सूटकेस लेकर चलने वाले हवाला कारोबारी का नहीं था। रास्ता एक फोन स्क्रीन और एक स्टेबलकॉइन का था।
प्रवर्तन निदेशालय के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म के जरिए 4,600 करोड़ रुपये से ज्यादा के अवैध सीमा-पार धन हस्तांतरण का आरोप लगाया है और मंगलवार को इस सिलसिले में बेंगलुरु में तीन तथा मध्य प्रदेश में एक ठिकाने पर छापे मारे।
मामला विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत है और इसमें RPAS टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड का नाम है, जो मड्रेक्स और सेबर.मनी चलाती है, साथ ही विकेंद्रीकृत वित्त प्रोटोकॉल इंस्टाडैप से जुड़ी संस्थाओं का भी।
एजेंसी के 29 अक्टूबर के बयान के मुताबिक छापे FEMA की धारा 37 के तहत मारे गए। जांच बड़े पैमाने पर FEMA उल्लंघन की शिकायतों पर शुरू हुई थी।
ईडी के मुताबिक कथित तरीका यह था: उपयोगकर्ता प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराते और कंपनी के बैंक खातों में पैसा जमा करते। उस पैसे से वर्चुअल डिजिटल संपत्ति, मुख्य रूप से USDT जैसे स्टेबलकॉइन खरीदे जाते, जिन्हें भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों पर बेचकर रकम तय प्राप्तकर्ता तक भेज दी जाती। प्लेटफॉर्म तुरंत अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर का विज्ञापन करते थे और मुद्रा को क्रिप्टो में बदलने तथा वापस बदलने की सेवा देते थे।
एजेंसी की आपत्ति अनुमति पर है। FEMA ढांचे के तहत सीमा-पार भुगतान के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी जरूरी है और ईडी का कहना है कि ये लेनदेन उसी को दरकिनार करके हुए।
शुरुआती निष्कर्षों में कनाडा, लिथुआनिया और अमेरिका में पंजीकृत संस्थाओं के जरिए बड़े पैमाने पर ओवर-द-काउंटर सौदों की ओर भी इशारा है, जो एजेंसी के मुताबिक विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म चलाती थीं और इन्हीं से भुगतान होते थे। कुछ संस्थाओं के पंजीकृत पतों पर न दफ्तर था, न कर्मचारी।
इंस्टाडैप पर, जो एथेरियम ब्लॉकचेन पर चलने वाला डीफाई प्रोटोकॉल है, ईडी का कहना है कि कारोबार भारत से उसके संस्थापक सोमय वालिया संभालते थे। शुरुआती निष्कर्ष इंस्टाडैप से जुड़े लेनदेन में करीब चार करोड़ डॉलर, यानी लगभग 340 करोड़ रुपये के कथित FEMA उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं।
किसी गिरफ्तारी की घोषणा नहीं हुई है और एजेंसी ने कंपनी तथा संस्थापक की पहचान के अलावा किसी को आरोपी नहीं बताया है। जांच जारी है।
ऐसे प्लेटफॉर्म के भारतीय उपयोगकर्ता के लिए मामला एक सीधे सवाल पर टिका है, जिसे ईडी अब कानून में परख रहा है: क्या रुपया डॉलर से जुड़ा टोकन बनकर विदेशी वॉलेट में पहुंचने पर FEMA के तहत देश से बाहर चला गया, और अगर गया तो जिम्मेदार कौन है।