नई दिल्ली: देश की टेलिकॉम कंपनियां नेटवर्क की गुणवत्ता नापने का मौजूदा तरीका बदलना चाहती हैं। उनका कहना है कि AI और नेटवर्क एनालिटिक्स की मदद से पारंपरिक ड्राइव-टेस्ट पर निर्भरता घटाई जा सकती है।
चर्चा की जानकारी रखने वाले दो लोगों के मुताबिक, दूरसंचार विभाग (DoT) मौजूदा सेवा-गुणवत्ता ढांचे की समीक्षा और उसे आसान बनाने के लिए संयुक्त समिति बनाने की योजना बना रहा है। अभी ट्राई गुणवत्ता मुख्य रूप से मैनुअल ड्राइव-टेस्ट से नापती है।
ड्राइव-टेस्ट यानी कंपनियों के कर्मचारियों का खास गाड़ियों से अलग-अलग इलाकों में घूमकर कॉल, डेटा और सिग्नल की जांच करना। इसमें बड़ा खर्च और समय लगता है। इसकी जगह नेटवर्क से मिलने वाले डेटा, वर्चुअल ड्राइव-टेस्ट और ग्राहकों की शिकायतों का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, समिति इस पर विचार कर सकती है।
कंपनियों का कहना है कि AI की मदद से नेटवर्क की दिक्कतें तेजी से और ज्यादा सटीक तरीके से पकड़ी जा सकती हैं। जहां कर्मचारी पहुंच नहीं पाते, वहां की जानकारी भी नेटवर्क डेटा से मिल सकती है। इससे सुधार का काम तेज हो सकता है।
लेकिन नए तरीके पर कुछ सवाल भी हैं। नेटवर्क डेटा पर आधारित माप वाकई ग्राहक के अनुभव को दिखाता है या नहीं, यह जांचना होगा। ग्राहकों की शिकायतों का इस्तेमाल कैसे होगा और ड्राइव-टेस्ट पूरी तरह बंद होंगे या साथ चलेंगे, यह अब तक साफ नहीं है।
सेवा-गुणवत्ता नियमों में बदलाव सीधे ग्राहकों पर असर डालते हैं, क्योंकि कॉल ड्रॉप, डेटा स्पीड और सिग्नल से जुड़ी शिकायतों की अनदेखी इन्हीं मानकों पर होती है। समिति की रिपोर्ट और उस पर आगे का फैसला अगले कुछ महीनों में तय होगा। ग्राहकों के लिए असली सवाल यह है कि नया तरीका उनके इलाके की कमजोर कवरेज को उतनी ही सटीकता से पकड़ेगा, जितना ड्राइव-टेस्ट पकड़ता है।