नई दिल्ली : नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने साफ किया है कि मेडिकल शिक्षा के मानक बनाए रखने संबंधी 2023 के नियम हटाने से तय मानकों में किसी तरह की ढील नहीं आएगी।
एनएमसी ने 14 अक्टूबर को 'मेंटेनेंस ऑफ स्टैंडर्ड्स ऑफ मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन्स, 2023' को हटाया था। कमीशन के मुताबिक, इस फैसले का मकसद ओवरलैपिंग प्रक्रियाओं को हटाना है।
राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 के तहत अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड के पास अकादमिक मानक, न्यूनतम जरूरतें और शिक्षा के नियम तय करने का अधिकार है। पुराने नियमों से संस्थागत मूल्यांकन, सालाना नवीनीकरण और जांच के लिए समांतर व्यवस्था बन गई थी।
कमीशन ने बताया कि सालाना डिस्क्लोजर रिपोर्ट देना अनिवार्य रहेगा। फैकल्टी, बुनियादी ढांचे, मरीजों की सुविधा और मरीजों की संख्या से जुड़ी जानकारी कॉलेजों को हर साल देनी होगी।
मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) के पास संस्थानों की जांच और जरूरतें पूरी न होने पर कार्रवाई का अधिकार बरकरार है। पुराने नियमों के तहत हुई कार्रवाई और प्रक्रियाएं भी सुरक्षित रहेंगी।
केवल एक प्रक्रियात्मक बदलाव हुआ है — पुराने नियमों में मांगी गई अतिरिक्त सालाना नवीनीकरण की शर्त हटाई गई है। कमीशन ने कहा कि नियमन को आसान बनाना नियमन में ढील नहीं है। मेडिकल कॉलेजों को फैकल्टी, बुनियादी ढांचा, मरीजों की सुविधा, शिक्षण व्यवस्था, उपस्थिति और अकादमिक मानकों से जुड़ी सभी न्यूनतम शर्तें पूरी करनी होंगी; इन शर्तों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कमीशन के मुताबिक, नियमन को ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए यह फैसला लिया गया। जरूरतें पूरी न करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार बरकरार है। सालाना डिस्क्लोजर रिपोर्ट भी जारी रहेंगी।