भुवनेश्वर : रिजर्व बैंक के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक अलग मुद्दा उठाया — पैसा भी युद्ध का मैदान है।
"आज जंग सिर्फ हथियारों से नहीं लड़ी जाती, यह हम सब जानते हैं। किसी देश को कमजोर करना हो तो उसकी अर्थव्यवस्था पर हमला करके भी किया जा सकता है। जैसे-जैसे भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, वैसे-वैसे अपनी बैंकिंग व्यवस्था को साइबर चोरों और साइबर आतंकियों से बचाना भी उतना ही जरूरी है," उन्होंने कहा।
₹169 करोड़ की लागत वाला यह कैंपस 18.55 एकड़ में बना है। इसमें चार डेटा सेंटर हैं और ये आरटीजीएस और एनईएफटी जैसे अहम पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम को जगह देंगे। अधिकारियों के मुताबिक यूटाइम इंस्टीट्यूट के टियर फोर प्रमाणन वाला यह केंद्र दुनिया के सबसे बड़े बैंकिंग डेटा सेंटरों में गिना जाएगा।
साइबर खतरों का स्वरूप बदलने की बात करते हुए मोदी ने कहा, "पुराने सिस्टम, पुराने प्रशिक्षण तरीके और बेकार हो चुके औजारों से इन नई चुनौतियों का सामना नहीं किया जा सकता। हमें आधुनिक ढांचा और कुशल मानव संसाधन दोनों चाहिए।"
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट प्रणाली बन गई है और हर महीने करीब ₹2,400 करोड़ के लेनदेन होते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 59 करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं। उनके मुताबिक इस कैंपस में साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा सेंटर तकनीक की विशेषज्ञता विकसित होगी।
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। "पहले दिल्ली के कुछ चुनिंदा लोगों और उनके करीबियों को फोन पर हजारों करोड़ का कर्ज मिल जाता था," उन्होंने कहा। उनका आरोप था कि इसी वजह से बैंकिंग व्यवस्था में एनपीए का पहाड़ खड़ा हो गया।
ओडिशा कांग्रेस के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने पलटवार किया। उनका आरोप है कि डिजिटल बैंकिंग के नाम पर गरीबों पर छिपा टैक्स लगाया जा रहा है और न्यूनतम बैलेंस, एटीएम शुल्क और डिजिटल लेनदेन के जरिए लाखों रुपये काटे जा रहे हैं।
दोनों पक्षों के मुद्दे अलग हैं, मगर मैदान एक ही है — भारत का डिजिटल पैसा।