न्यू यॉर्क: उपयोगकर्ताओं का निजी डेटा कैसे जुटाया जाता है और सुरक्षित रखा जाता है, इस पर फेसबुक ने भ्रामक जानकारी दी, ऐसा अदालत ने मानने के बाद मेटा कंपनी को अमेरिका के न्यू मेक्सिको राज्य को 25 अरब डॉलर देने का आदेश दिया गया है।
इसे टेक कंपनी पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना बताया जा रहा है। न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने यह मामला चलाया था।
जुर्माने की रकम और ब्योरे फिलहाल विवाद के दायरे में हैं और कंपनी इस फैसले के खिलाफ कानूनी कदम उठा सकती है। मेटा ने फेसबुक के जरिए बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं का डेटा संभाला है।
डेटा सुरक्षा को लेकर दुनिया भर के नियामकों का ध्यान टेक कंपनियों के कामकाज पर टिका है। ग्राहकों की जानकारी कैसे इस्तेमाल होती है और इसके लिए सहमति कैसे ली जाती है, यही मामले का केंद्र बिंदु है।
इस फैसले से दूसरे देशों के नियामकों को भी बड़ी टेक कंपनियों पर सख्ती बरतने का आधार मिला है। भारत में भी डिजिटल निजी डेटा संरक्षण कानून के तहत कंपनियों की जवाबदेही तय होती है।
मेटा इससे पहले भी कई देशों में डेटा और निजता से जुड़े जुर्माने झेल चुकी है। नए जुर्माने से उपयोगकर्ताओं की जानकारी की सुरक्षा को लेकर ज्यादा गंभीरता आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, डेटा हैंडलिंग की पारदर्शिता पर नियम सख्त हो रहे हैं।
निजता और डेटा संरक्षण के नियम अमेरिका, यूरोप और भारत समेत कई देशों में सख्त हो रहे हैं। कंपनियों को सहमति और डेटा हैंडलिंग का पारदर्शी रिकॉर्ड रखना जरूरी होता जा रहा है। इस फैसले से बड़ी टेक कंपनियों को अपनी डेटा नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। भारत में डिजिटल निजी डेटा संरक्षण कानून के तहत उपभोक्ताओं को शिकायत का अधिकार है।