मुंबई: नागपुर में 41 घंटे से ज्यादा चली मतगणना गुरुवार तड़के खत्म हुई, और नतीजा वही निकला जिसका सबसे ज्यादा डर सत्ता पक्ष को था। कांग्रेस के अभिजित वंजारी ने नागपुर विभाग स्नातक सीट 3,271 वोटों से जीत ली। वंजारी को 67,231 और भाजपा के सुधाकर कोहले को 63,960 वोट मिले।
यह सिर्फ एक सीट नहीं है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का शहर, केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी का संसदीय क्षेत्र और RSS का मुख्यालय, तीनों यहीं हैं। गडकरी 1990 से 2014 तक इसी स्नातक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। यहां की हार सबसे ज्यादा चुभेगी।
23 अक्टूबर को पांच सीटों पर वोट पड़े थे। MVA को तीन और महायुती को दो सीटें मिलीं। नतीजा आया तो गठबंधन के भीतर घमासान शुरू हो गया। भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना पर आरोप लगाया कि पुणे और नागपुर में उसने साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पुणे स्नातक क्षेत्र में शिवसेना ने आखिरी वक्त में निर्दलीय सचिन सानप को समर्थन दिया, और छत्रपती संभाजीनगर में शिवसेना के अब्दुल सत्तार ने NCP के खिलाफ ही प्रचार किया। "एकजुट रहते तो पांचों सीटें जीत लेते," उन्होंने कहा।
शिवसेना ने पलटवार किया। पार्टी नेता आनंद परांजपे ने कहा कि सीट बंटवारे में शुरू से तालमेल नहीं था। पुणे में शिवसेना के शहर प्रमुख रवींद्र धंगेकर ने कहा, "भाजपा को गठबंधन साझेदारों को हल्के में लेना बंद करना चाहिए।"
नागपुर में 15,000 से ज्यादा वोट अवैध करार दिए गए। इनमें करीब 9,000 पर्चों पर कोहले के खिलाफ सिर्फ '2' लिखा था, बाकी 37 उम्मीदवारों के लिए कोई वरीयता नहीं दी गई थी। कोहले ने कहा कि वे अवैध वोटों के खिलाफ अपील करेंगे। प्रचार के प्रभारी रहे मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने हार की जिम्मेदारी ली और कहा कि "किसने खेल बिगाड़ा, यह पता लगाया जाएगा"।
पुणे स्नातक सीट NCP (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख-जाधव ने जीती, उन्होंने भाजपा की स्मिता जाधव को हराया। पुणे शिक्षक सीट भाजपा के कौस्तुभ गावडे के पास गई, अमरावती शिक्षक सीट शिवसेना के किरण सारनाईक ने जीती। छत्रपती संभाजीनगर स्नातक सीट पर NCP (शरदचंद्र पवार) के प्रतापसिंह पाटील ने NCP के सतीश चव्हाण को हराया। NCP की सुनेत्रा पवार ने कहा कि पार्टी नतीजों पर आत्ममंथन करेगी।