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आईआरसीटीसी होटल केस: लालू, राबड़ी और तेजस्वी पर आरोप तय 19 नवंबर तक टले

आईआरसीटीसी होटल मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने की कार्यवाही दिल्ली की अदालत ने शुक्रवार को 19 नवंबर तक के लिए टाल दी। अभियोजन ने मोहलत का विरोध नहीं किया।

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नई दिल्ली: आईआरसीटीसी होटल मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप औपचारिक रूप से तय करने की कार्यवाही दिल्ली की अदालत ने शुक्रवार को तीन हफ्ते के लिए टाल दी।

विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने सुनवाई 19 नवंबर तक स्थगित की। मोहलत मांगने वाली अर्जियों का अभियोजन पक्ष ने विरोध नहीं किया। लेकिन न्यायाधीश ने साफ किया कि किसी वरिष्ठ अदालत के आदेश से छूट पाए या स्थगन के दायरे में आए आरोपियों को छोड़कर हर आरोपी को अगली तारीख पर हाजिर होना होगा।

अदालत के सामने प्रवर्तन निदेशालय की मनी लॉन्ड्रिंग शिकायत है। कुल 16 लोग आरोपी हैं। 10 सितंबर को पहले की अदालत ने इनमें से सात को बरी किया और बाकी नौ पर आरोप तय करने का आदेश दिया।

उस अदालत ने दर्ज किया था कि आरोपियों के खिलाफ गंभीर संदेह है और जांच की प्रकृति, समय व रास्ता यह नहीं दिखाते कि शिकायत लालू प्रसाद के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से की गई। उनके वकील ने यही दलील दी थी।

दूसरी लाइन पहले ही आगे बढ़ चुकी है। पिछले अक्टूबर में उसी अदालत ने इसी कथित घोटाले से जुड़े सीबीआई मामले में राजद नेता और 11 अन्य पर भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे।

एजेंसी के मुताबिक कथित घोटाला 2005 से 2014 के बीच हुआ, जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। आरोप है कि रांची और पुरी के आईआरसीटीसी होटलों का पट्टा सुजाता होटल्स को देने के लिए रेल अधिकारियों ने निविदा में हेरफेर किया।

बदले में सुजाता होटल्स के निदेशक विनय कोचर और विजय कोचर ने पटना की कीमती जमीन कम दाम पर डीएमसीपीएल कंपनी को हस्तांतरित की, ईडी ने यह आरोप लगाया। वह कंपनी प्रेमचंद गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता के नियंत्रण में थी, जिन्हें एजेंसी ने लालू प्रसाद का करीबी बताया है।

उस कंपनी के शेयर बेहद कम कीमत पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को हस्तांतरित हुए, और जमीन पर नियंत्रण रखने वाली इकाई लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी बनी, ऐसा ईडी का दावा है।

यह सब अभी आरोपों के चरण में है। आरोप तय करना वह मुकाम है जब अदालत बताती है कि वह किस बात पर सुनवाई करेगी। आरोपियों ने गलत काम से इनकार किया है और सबूतों पर फैसला अभी नहीं हुआ है।

लालू प्रसाद के वकील ने राजनीतिक मंशा की दलील दी थी; 16 में से नौ पर आरोप तय करने का आदेश देते समय अदालत ने पहले के चरण में उस ढांचे को खारिज किया था।

स्थगन के बाद विशेष अदालत के सामने सभी आरोपियों के हाजिर होने का पहला मौका 19 नवंबर को मिलेगा।