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दो अर्ज रद्द, फॉर्म-26 पर सियासत: हरदीप पुरी बिना मुकाबले राज्यसभा पहुंचने की राह पर

मध्य प्रदेश में रिटर्निंग अधिकारी ने मंगलवार को जांच के दौरान कांते सयान्ना और कांग्रेस समर्थित राजकुमार लोहानी के नामांकन रद्द कर दिए, जिससे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी राज्यसभा उपचुनाव में अकेले उम्मीदवार बचे हैं। कांग्रेस ने पुरी के फॉर्म-26 हलफनामे पर आपत्ति जताई है और कोर्ट जाने की बात कही है। नतीजा 5 नवंबर को आना है।

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भोपाल: मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का फैसला वोटिंग से तीन दिन पहले ही जांच की मेज पर हो गया है।

अधिकारियों के मुताबिक रिटर्निंग अधिकारी उमेश शर्मा ने मंगलवार को, जांच के आखिरी दिन, कांते सयान्ना और कांग्रेस समर्थित राजकुमार लोहानी के नामांकन पत्र रद्द कर दिए। अब मैदान में सिर्फ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी बचे हैं। नतीजा 5 नवंबर को घोषित होना है, जो नाम वापसी की आखिरी तारीख है।

यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के 14 अक्टूबर को इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था। चुनाव आयोग ने 22 अक्टूबर को कार्यक्रम जारी किया था और नामांकन 2 नवंबर तक भरे गए।

सयान्ना, लोहानी और कांग्रेस नेता हेमंत कटारे ने पुरी के कागजात पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि फॉर्म 26 में दिया गया हलफनामा अधूरा और अमान्य है। शर्मा ने आपत्तियों पर सुनवाई की और पाया कि पुरी ने लोक प्रतिनिधित्व कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया। अपने आदेश में उन्होंने कहा, "पुरी के कागजात में कोई कमी नहीं पाई गई।"

कांग्रेस ने यह फैसला नहीं माना। कटारे और कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने बयान में इसे "भारतीय लोकतंत्र पर हमला" कहा और कहा कि वे अदालत जाएंगे। "इतनी बड़ी खामियों के बावजूद नामांकन रद्द नहीं किया गया," उन्होंने कहा।

2018 से राज्यसभा सदस्य रहे पुरी को 2021 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय मिला और वे तब से उसी पद पर हैं। भाजपा ने उन्हें दोबारा नामित नहीं किया, और उत्तर प्रदेश से आने वाले द्विवार्षिक चुनाव में राजीव चंद्रशेखर समेत कुछ नए चेहरों को मौका दिया गया।

मध्य प्रदेश का गणित शुरू से ही मुकाबला कठिन बनाता था। 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास बड़ा बहुमत है और राज्य से एक राज्यसभा सीट के लिए उसका एक छोटा हिस्सा ही काफी है। दोनों विरोधी नामांकन बाहर होने के बाद चुनाव औपचारिकता बन गया है।

कांग्रेस के लिए लड़ाई अब बैलेट बॉक्स से निकलकर अदालत और प्रक्रिया की भाषा में पहुंच गई है। शिकायत संकरी और तकनीकी है, और ऐसी शिकायतें सुनने में अदालतों को वक्त लगता है। पार्टी ने यह नहीं बताया कि याचिका कब दायर होगी।

कैलेंडर पर अब एक ही तारीख बची है: 5 नवंबर, जब रिटर्निंग अधिकारी नतीजा सुनाएंगे। अगर तब तक कुछ नहीं बदला, तो पुरी बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के सदन में लौटेंगे।