नई दिल्ली: विपक्ष के 'वोट चोरी' अभियान का जवाब बीजेपी ने सड़क पर देना शुरू कर दिया है। बुधवार को कम से कम तीन राज्यों में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च निकाले जा रहे हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रों का बड़ा जमावड़ा है।
भोपाल का मार्च केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा की अगुवाई में अटल पथ से शुरू होकर रोशनपुरा चौक पर खत्म होगा। मंगलवार को उन्होंने बरेली में इसी अभियान की यात्रा को संबोधित करते हुए कांग्रेस, इंडी गठबंधन और समाजवादी पार्टी पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता घटाने का आरोप लगाया था।
नड्डा ने कहा था कि देशभर में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) का मकसद मृत, पलायन कर चुके, गैरहाजिर और एक से ज्यादा बार दर्ज मतदाताओं के नाम हटाकर सूची साफ करना है।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नबीन दोपहर 12 बजे गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मार्च में शामिल होंगे। पार्टी के बयान के मुताबिक मार्च महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से निकलकर सरदार पटेल की प्रतिमा के पास माता काली मंदिर तक जाएगा। नबीन दो दिन के संगठनात्मक दौरे पर हैं। मार्च के बाद वह तारामंडल के एनेक्स भवन में समाज के प्रमुख लोगों से मुलाकात करेंगे, फिर पार्टी के जनप्रतिनिधियों से मिलेंगे और शाम को प्रदेश बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक लेंगे। गुरुवार सुबह 8 बजे गोरखनाथ मंदिर में दर्शन करेंगे।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने यूपी में संगठनात्मक काम तेज कर दिया है।
दिल्ली में पूर्वी इलाके में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा मार्च में शामिल होंगे।
एबीवीपी के मुताबिक दिल्ली यूनिवर्सिटी के रग्बी मैदान से क्रांति चौक तक 15,000 से ज्यादा छात्र 'अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' के नारे के साथ कूच करेंगे। संगठन ने कहा कि यह उन ताकतों के खिलाफ छात्रशक्ति का संयुक्त मार्च है जो चल रहे अलग-अलग आंदोलनों के जरिए देश में अव्यवस्था फैलाकर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।
रविवार को रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की रैली में 'वोट चोरी' के आरोप पर बीजेपी को सत्ता से हटाने की मांग उठी थी। वहां राहुल गांधी ने कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आगे हटाया जाएगा और 'देशद्रोह' के आरोप में जेल भेजा जाएगा, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह कानून से बच नहीं पाएंगे।
दोनों तरफ के कैलेंडर भर गए हैं। मतदाता सूची की प्रक्रिया और उससे भरी जा रही सड़कें, आगे की राजनीति तय करेंगी।