कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के करीब 20 बागी सांसदों ने त्रिपुरा आधारित पार्टी एनसीपीआई में विलय का प्रस्ताव दिया है. यह पार्टी फिलहाल एनडीए में है. इससे लोकसभा और राज्यसभा में एनडीए की ताकत बढ़ सकती है.
काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले इन सांसदों ने विलय का प्रस्ताव दिया है और यह मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास पहुंचा है. उम्मीद है कि टीएमसी नेतृत्व, खासकर लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी की बात सुनने के बाद अध्यक्ष अंतिम फैसला करेंगे.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल में असंतोष बढ़ा है. इसी पृष्ठभूमि में विपक्ष के नेता पद पर दावा करने वाले रितब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के समर्थन का दावा किया था. पार्टी में सुधार न होने पर कुछ नेताओं ने पद छोड़े हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं के दलबदल को रोकने की याचिका खारिज की है. कोर्ट ने कहा था कि आरोप अस्पष्ट हैं और ठोस सामग्री नहीं है.
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक विलय होने पर लोकसभा और राज्यसभा के गणित पर असर पड़ सकता है. पार्टी के कुछ विधायकों ने भी बेचैनी जताई है.
एनसीपीआई त्रिपुरा की छोटी पार्टी है और एनडीए का हिस्सा है. विलय के नियमों के मुताबिक सदन के दो-तिहाई सदस्य विलय के पक्ष में हों तो इसे मान्यता मिल सकती है. विश्लेषकों का मानना है कि इससे लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के गणित पर असर पड़ सकता है.
तृणमूल ने इसे विपक्ष की राजनीति बताकर खारिज किया है. नेतृत्व ने कहा है कि पार्टी अपनी बात अध्यक्ष के सामने रखेगी. अंतिम फैसला अध्यक्ष के कार्यालय पर निर्भर है.