वाशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप को दोबारा व्हाइट हाउस भेजने के दो साल बाद अमेरिकी मतदाताओं ने कांग्रेस के दोनों सदन डेमोक्रेट्स को सौंप दिए हैं। सीबीएस न्यूज ने बुधवार को अनुमान जताया कि पार्टी के पास सीनेट की 54 सीटें होंगी, जबकि रिपब्लिकन के पास 44। जरूरत की शुद्ध सीटें उन्होंने हासिल कर लीं। एसोसिएटेड प्रेस ने हाउस भी डेमोक्रेट्स के खाते में डाल दिया।
सीनेट का नक्शा उन जगहों पर टूटा जिन्हें रिपब्लिकन अपने पास मानकर चल रहे थे। डेमोक्रेट्स ने टेक्सास, साउथ कैरोलिना और कंसास में उलटफेर किया, मेन, आयोवा, ओहायो और नॉर्थ कैरोलिना पलटे, और मिशिगन, जॉर्जिया तथा न्यू हैम्पशायर बचाए रखे। मिशिगन में अब्दुल अल-सईद ने रिपब्लिकन माइक रोजर्स को हराया। ओहायो में शेरोड ब्राउन ने सीनेट सीट जीती और एमी एक्टन ने गवर्नर की दौड़ में विवेक रामास्वामी को पछाड़ा।
अलास्का और मिसिसिपी की सीनेट दौड़ें मतगणना के बीच अब भी कांटे की बताई जा रही थीं। दोनों सदनों पर नियंत्रण बदलने से उस दो साल की राजनीति का गणित बदल गया है जो अब विपक्ष में बीतेगी।
प्रचार मुख्य रूप से महंगाई और उस ईंधन कीमत पर लड़ा गया, जो ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान चढ़ी थी। ट्रंप की पार्टी ऐसी अर्थव्यवस्था बचाने मैदान में उतरी थी, जिसे मतदाताओं ने बेहतर महसूस नहीं किया — चाहे आंकड़े कुछ भी कहें।
भारत के लिए मुंबई और दिल्ली में इसका मतलब सुर्खी से छोटा है। एमके रिसर्च के मुताबिक कांग्रेस पर डेमोक्रेटिक नियंत्रण टैरिफ और इमिग्रेशन पर निगरानी बढ़ा सकता है, लेकिन इन टकरावों को बदलने की संभावना कम है। बड़ा जोखिम चुनाव के बाद ईरान संघर्ष के फिर भड़कने का है, जो भारत के भुगतान संतुलन और करेंसी पर बोझ डालेगा। आईसीआईसीआई ग्लोबल मार्केट्स के मुताबिक बंटी कांग्रेस से सरकार बंद होने का खतरा बढ़ता है, क्योंकि डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन की बजट प्राथमिकताएं कभी नहीं मिलतीं।
डेमोक्रेटिक कांग्रेस अकेले टैरिफ पलट नहीं सकती और विदेश नीति में राष्ट्रपति के पास बड़ी छूट रहती है। जो बदलता है, वह है जांच की संख्या और किसी भी विधेयक, खर्च के बिल तक, को पारित कराने की मुश्किल।
यह लिखे जाने तक कुछ सीटों पर मतगणना चल रही थी। दोनों सदनों में बहुमत अनुमान हैं, अंतिम आंकड़े नहीं।