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अमेरिकी नागरिक इमरान खान आंदोलन में शामिल; किरीट सोमैया ने पुलिस से कार्रवाई मांगी

अमेरिका की नागरिकता रखने वाले बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान के मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान के आंदोलन में शामिल होने से विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने सवाल उठाया है कि क्या कोई विदेशी नागरिक भारत में आंदोलन कर सकता है।

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अभिनेता इमरान खान, मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान के आंदोलन में

मुंबई: मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान पर हुए आंदोलन में शामिल होने से बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान एक नए विवाद में फंस गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता किरीट सोमैया ने इमरान खान की नागरिकता पर आपत्ति जताई है और सीधा सवाल किया है कि कोई विदेशी नागरिक भारत में इस तरह आंदोलन में उतरने का अधिकार कैसे रख सकता है।

इमरान खान अमेरिका के नागरिक

इमरान खान का जन्म अमेरिका के विस्कॉन्सिन (मैडिसन) में हुआ था और वे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। भारत में बॉलीवुड में सक्रिय होने के बावजूद उनके पास अमेरिका का पासपोर्ट और नागरिकता है। इसी मुद्दे को लेकर किरीट सोमैया ने उनकी भागीदारी पर सवालिया निशान लगाया है।

पुलिस से कार्रवाई की मांग किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी दी कि उन्होंने मुंबई के सह पुलिस आयुक्त मनोज कुमार शर्मा को आधिकारिक पत्र भेजा है। उन्होंने मांग की है कि एक विदेशी नागरिक के भारत में आंदोलन में हिस्सा लेने के मामले में इमरान खान पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। इस घटनाक्रम के बाद एक समाचार एजेंसी ने इमरान खान से संपर्क की कोशिश की, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

“मैं इस शहर का नागरिक बनकर आया हूं”: इमरान खान

पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से पहले इमरान खान ने मीडिया से बात करते हुए अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा, “मैं यहां एक नागरिक के नाते और इसी शहर में रहने वाले निवासी के तौर पर आया हूं। मैं यह देखने के लिए यहां मौजूद हूं कि लोगों की आवाजाही और घूमने-फिरने की आजादी (Freedom of Movement) पर अचानक पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं, और जनता की आवाज क्यों दबाई जा रही है।” इसके बाद पुलिस ने उन्हें आंदोलन स्थल से हिरासत में ले लिया।

क्या कानून के तहत विदेशी नागरिकों को भारत में आंदोलन का अधिकार है?

इस मुद्दे पर कानूनी राय रखते हुए भाजपा के युवा वकील कार्यकर्ता राज सराफ ने कहा: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत बोलने, अभिव्यक्ति और एकत्र होने के मौलिक अधिकार मुख्य रूप से भारतीय नागरिकों को मिले हैं। इसलिए भारत की नीतियों के खिलाफ देश में आंदोलन करने का मौलिक अधिकार किसी विदेशी नागरिक को नहीं होता।