मुख्य सामग्री पर जाएं
मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री
राजनीतिमहाराष्ट्र

सिंधुदुर्ग में भारत का पहला पानी के नीचे का संग्रहालय बना: पर्यटन मंत्री शंभुराज देसाई

सिंधुदुर्ग के निवती रॉक के पास पूर्व आईएनएस गुलदार युद्धपोत को समुद्र तल पर रखा गया है। इससे भारत का पहला पानी के नीचे का पर्यटन संग्रहालय और कृत्रिम प्रवाल भित्ति बनने की राह खुली है।

लेखक: Team DGIPR· · 2 मिनट में पढ़ें
सिंधुदुर्ग के निवती रॉक के पास समुद्र तल पर रखा गया पूर्व आईएनएस गुलदार युद्धपोत
फ़ोटो: Team DGIPR

मुंबई, 21 मई: महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (MTDC) के जरिए सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना के युद्धपोत ‘पूर्व आईएनएस गुलदार’ को सिंधुदुर्ग जिले के निवती रॉक इलाके में समुद्र तल पर सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इससे पानी के नीचे पर्यटन की सबसे महत्वाकांक्षी और अनोखी परियोजनाओं में से एक पूरी हुई है। पर्यटन मंत्री शंभुराज देसाई ने बताया कि M/s माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ मिलकर लागू की जा रही यह परियोजना भारत के पर्यटन क्षेत्र के लिए अहम पड़ाव है और विश्वस्तरीय समुद्री पर्यटन आकर्षण बनने की क्षमता रखती है।

मंत्री देसाई ने कहा कि यह पहल भारत के पहले एकीकृत अनुभवात्मक पर्यटन केंद्र की शुरुआत है, जिसके केंद्र में एक सबमरीन है। यहां निर्देशित मलबा गोताखोरी और सबमरीन यात्रा, 'डिस्कवर स्कूबा डाइविंग' (12 मीटर तक), प्रमाणित गोताखोरों के लिए अभियान (18 मीटर तक), एडवांस डाइविंग अनुभव (30 मीटर तक), पानी के भीतर फोटोग्राफी टूर और समुद्री शिक्षा व शोध के अवसर मिलेंगे। गोता स्लॉट, सबमरीन बुकिंग और पर्यटकों की सुविधाओं की जानकारी MTDC के आधिकारिक माध्यमों से जल्द घोषित की जाएगी।

मंत्री देसाई ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार के मार्गदर्शन में गति मिली है। इसके अलावा राज्य मंत्री इंद्रनील नाइक, पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय खांडरे और MTDC के प्रबंध निदेशक निलेश गाटणे (IAS) के सहयोग से परियोजना लागू हो रही है। यह परियोजना भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की 'वैश्विक मानकों के प्रमुख पर्यटन केंद्रों के विकास' योजना के तहत, 'पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता' (SASCI) कार्यक्रम के जरिए MTDC विकसित कर रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 46.91 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र सरकार ने 112.46 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

पूर्व आईएनएस गुलदार भारतीय नौसेना का 'मगर' श्रेणी का लैंडिंग शिप टैंक (LST) युद्धपोत था। 39 वर्ष की सेवा के बाद इसे 12 जनवरी 2024 को भारतीय नौसेना से निवृत्त किया गया था। इसे 30 दिसंबर 1985 को पोलैंड के ग्डिनिया शिपयार्ड में सेवा में शामिल किया गया था। 83.9 मीटर लंबे इस पोत का इस्तेमाल उभयचर युद्ध अभियानों, सैनिकों और रसद के परिवहन, तटीय सुरक्षा और नौसेना के विभिन्न प्रशिक्षण अभ्यासों में होता रहा। 19 मई 2026 को M/s माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई के जरिए इस पोत को सिंधुदुर्ग तट के पास निवती रॉक के निकट लगभग 22 मीटर गहराई में समुद्र तल पर सफलतापूर्वक रखा गया। यह स्थान महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के बाद चुना गया। अध्ययन में पुष्टि हुई कि इस इलाके में प्राकृतिक प्रवाल भित्तियां नहीं हैं, जिससे परियोजना का पर्यावरण पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। मंत्री देसाई ने यह भी कहा कि प्रमाणित किया गया है कि इससे पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा।

डुबोए जाने से पहले पोत की व्यापक पर्यावरणीय सफाई की गई। पूर्व आईएनएस गुलदार का मजबूत इस्पात ढांचा अब कृत्रिम प्रवाल भित्ति का काम करेगा, जिससे समुद्री जैव विविधता, प्रवाल वृद्धि, मत्स्य संसाधन और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना में पर्यटक जेट्टी से स्पीडबोट द्वारा निवती रॉक जाएंगे, वहां खड़ी बार्ज पर चढ़ेंगे और फिर डूबे हुए पोत में प्रवाल और समुद्री जीवन को सबमरीन यात्रा या स्कूबा डाइविंग के जरिए देख सकेंगे।

**परियोजना के बहुआयामी प्रभाव**

इस परियोजना से सिंधुदुर्ग समेत पूरे कोंकण तट की पर्यटन अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी से स्थानीय कारोबार, आवास सुविधाओं, परिवहन सेवाओं, खाद्य उद्योग और सामान्य पर्यटन सेवाओं को गति मिलेगी। लंबी अवधि में यह परियोजना स्थानीय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सहायक व्यवसायों के विस्तार का अहम केंद्र बन सकती है।

यह परियोजना महाराष्ट्र में पहली बार विश्वस्तरीय सबमरीन पर्यटन अनुभव की शुरुआत है। इससे साहसिक पर्यटन, स्कूबा डाइविंग, पानी के भीतर खोज और समुद्री पर्यटन के क्षेत्रों में नया आयाम जुड़ेगा और देश के प्रमुख साहसिक पर्यटन गंतव्य के रूप में महाराष्ट्र की पहचान मजबूत होगी। समय के साथ समुद्र तल पर पड़ा यह युद्धपोत कृत्रिम प्रवाल भित्ति में बदल जाएगा, जो समुद्री जैव विविधता के लिए अनुकूल वातावरण बनाएगा। यह मछलियों, समुद्री वनस्पतियों और सूक्ष्मजीवों की कई प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करेगा।

यह पहल भारतीय नौसेना में सेवा दे चुके एक युद्धपोत के पर्यावरण-अनुकूल और पर्यटन-उन्मुख पुनः उपयोग से जुड़ी है, जो राष्ट्र सेवा की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देती है। इसके जरिए नौसेना के गौरवशाली इतिहास और समुद्री विरासत को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा। यह परियोजना महाराष्ट्र को नवाचार और टिकाऊ पर्यटन पहल में अग्रणी राज्यों में खड़ा करती है। साथ ही यह भारत की समुद्री पर्यटन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी मदद करेगी। टिकाऊ और नवाचार आधारित पर्यटन में महाराष्ट्र और भारत दोनों की वैश्विक साख इससे और मजबूत होगी।

इस परियोजना को अमेरिका के फ्लोरिडा में USS Oriskany और ऑस्ट्रेलिया के HMAS Swan जैसे विश्वस्तरीय मलबा गोताखोरी स्थलों से प्रेरणा लेकर विकसित किया गया है। यह भारत का पहला विश्वस्तरीय पानी के नीचे का संग्रहालय और कृत्रिम प्रवाल भित्ति पर्यटन पहल बनने जा रहा है। प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि इस पहल की जानकारी देश और विदेश, दोनों जगह के लोगों तक पहुंच चुकी है।