नई दिल्ली: जांच कर रही एजेंसी ने अब यह रुख भी साफ कर दिया है कि मामला कहां सुना जाए।
29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में CBI ने कहा है कि तृषा शर्मा मौत मामले के दोनों आरोपियों के भोपाल में मुकदमे को प्रभावित करने और गवाहों को डराने की पूरी संभावना है। एजेंसी ने तृषा के पिता नवनीधि शर्मा की उस मांग को व्यावहारिक रूप से उठाकर आगे बढ़ाया है कि सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर, बेहतर हो कि दिल्ली में हो।
हलफनामे में CBI ने कहा, "इस मामले की गंभीरता इस आरोप से जाहिर होती है कि घटना के बाद गिरिबाला सिंह ने क्राइम सीन संभालने और सबूत से छेड़छाड़ की कोशिश की।" एजेंसी ने जोड़ा कि "ऐसी कई घटनाएं हैं जो राज्य पुलिस की जांच में उनके बेवजह हस्तक्षेप को साफ दिखाती हैं"।
गिरिबाला सिंह भोपाल की रिटायर्ड प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं और घटना के समय भोपाल की जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्ष थीं। उनके पति समर्थ सिंह भोपाल में वकालत करते हैं। दोनों मुख्य आरोपी हैं।
हलफनामे में CBI ने अपनी बात के लिए दो घटनाओं का जिक्र किया है। एजेंसी के मुताबिक गिरिबाला सिंह ने एक तकनीशियन को बुलाकर संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज की कॉपी हासिल की। दूसरी घटना में उन्होंने 13 मई को एक ब्यूटी पार्लर के मालिक से पूछा कि 12 मई को तृषा वहां आई थी या नहीं, और लोगों को भेजकर वह फुटेज मंगाई।
तृषा, 33 साल की, नोएडा की रहने वाली और पूर्व मिस पुणे, ने दिसंबर 2025 में समर्थ सिंह से शादी की थी। 12 मई, 2026 की रात वह भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में फांसी पर लटकी मिलीं और उन्हें एम्स भोपाल में मृत लाया गया घोषित किया गया।
तीन दिन बाद गिरिबाला सिंह और उनके बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। एक हफ्ते के भीतर, 22 मई को, मध्य प्रदेश सरकार ने CBI जांच की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया और उसके तुरंत बाद एजेंसी ने जांच संभाल ली।
CBI ने 17 अगस्त को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 (क्रूरता), 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 3(5) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। एफआईआर में लगी दहेज से जुड़ी धाराएं आरोपपत्र में नहीं रखी गईं, हालांकि हलफनामे में कहा गया है कि दहेज मौत के आरोपों और अन्य पहलुओं की आगे जांच जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल सत्र अदालत की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा रखी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत तथा न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई एक हफ्ते के लिए टाल दी, क्योंकि प्रतिवादियों के वकील ने समय मांगा।
CBI ने खुद स्थानांतरण की औपचारिक मांग नहीं की है। उसने अदालत से कहा है कि न्याय के हित में जो उचित हो, वह आदेश दे।