नई दिल्ली: दिवाली पर पटाखों की सालों पुरानी सख्ती का हश्र क्या हुआ है, सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कह दिया — उसके आदेश 'जहां-तहां' तोड़े गए हैं।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने गुरुवार को पटाखों और हवा की गुणवत्ता से जुड़ी पुरानी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सार्वजनिक स्वास्थ्य और दूसरे मूल अधिकारों की रक्षा के अधीन है।
बेंच ने अपनी स्थिति को देशव्यापी पूर्ण पटाखा बंदी में बदलने से इनकार किया। पूरी बंदी का 'सिलसिलेवार असर' हो सकता है — कोर्ट ने यह बात ऐसे आदेश से लाइसेंसधारी व्यापारियों, रोजगार और त्योहार की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को तौलते हुए कही।
जो किया, वह अमल की जिम्मेदारी आगे बढ़ाना था। नकली और प्रतिबंधित पटाखे बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश केंद्र और दिल्ली सरकार को दिए गए। बिना लाइसेंस का, बड़े आकार का और रसायनों के मामले में संदिग्ध माल ही मौसमी प्रदूषण बढ़ने की केंद्र में रहा है।
कोर्ट के आदेश सालों से दो चीजों पर टिके हैं: क्या बिकता है उसकी रासायनिक बनावट, और कहां व कब फोड़ा जा सकता है। बेरियम वाले और दूसरे प्रतिबंधित मिश्रणों पर रोक है; जुड़े पटाखों और तय डेसिबल सीमा से तेज पटाखों की बिक्री पर नियंत्रण है। अमल राज्य पुलिस और प्रदूषण बोर्डों के पास रहा, और आदेश तथा जमीनी हकीकत का फासला कोर्ट के अपने रिकॉर्ड में भी दिखता है।
दिल्ली की हवा सालों से इस मामले की पृष्ठभूमि रही है। इस अक्टूबर शहर का रिकॉर्ड तुलनात्मक रूप से साफ रहा — 1 से 29 अक्टूबर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक करीब 191 रहा, कोई भी दिन 300 से ऊपर नहीं गया; अक्टूबर 2024 में ऐसे 12 दिन और अक्टूबर 2025 में आठ दिन थे।
मौसम ने साथ दिया। गुरुवार रात और शुक्रवार तड़के हुई बारिश से 24 घंटे का आंकड़ा तेजी से नीचे आया और दिन में और बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने जताया है।
त्योहार कुछ दिन दूर है। अगली बहस त्योहार के अधिकार पर नहीं, बल्कि विक्रेताओं और भंडारण पर होगी, यह बेंच ने साफ कर दिया।