मुंबई: बोरीवली की एक जमीन से अतिक्रमण हटने तक बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अपना वेतन नहीं ले सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह आदेश दिया, आयुक्त अश्विनी भिडे को अवमानना नोटिस जारी किया और पाया कि वे दो पहले की समय-सीमाओं को जानबूझकर न मानने की दोषी दिखती हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बीईएसटी बस स्टैंड के लिए आरक्षित जमीन पर काबिज लोगों के खिलाफ बेदखली का आदेश जारी करने के लिए और समय देने की निगम की गुजारिश ठुकरा दी। निगम पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और कहा गया कि आदेश पूरा होने तक नगर निगम और महाराष्ट्र सरकार आयुक्त का वेतन जारी नहीं करेंगे।
अदालत अपने ही 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 के आदेशों पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें अतिक्रमण हटाने की समयबद्ध प्रक्रिया तय की गई थी। पीठ ने कहा कि वह प्रथमदृष्टया संतुष्ट है कि आयुक्त ने इन आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि जमीन अब भी खाली न हुई तो जेल भेजने का विकल्प खुला है।
बुधवार तक निगम हरकत में आ चुका था और साइट पर अवैध ढांचों के खिलाफ टीमें लग गईं। यही अदालत दो आदेशों और एक साल से मांग रही थी।
मामला सार्वजनिक जमीन के उस टुकड़े का है जो बस स्टैंड के लिए आरक्षित है। भीड़भाड़ वाले शहर में ऐसी जमीन चुपचाप कब्जे में चली जाती है और लौटती नहीं। बोरीवली का बस टर्मिनस पश्चिमी लाइन के लाखों यात्रियों का सहारा है। जमीन काबिज होने से जो बस स्टैंड नहीं बन पाता, उसकी कीमत भीड़ और शुरू न हो पाने वाले रूट में दिखती है।
आदेश वेतन रोकता है, लेकिन उन अधिकारियों का नाम नहीं लेता जिन्होंने असल में कार्रवाई नहीं की। न ही पालन के लिए नई तारीख तय हुई है और न यह तय है कि बेदखली शुरू होने पर काबिज लोगों का क्या होगा।
निगम के सामने मुश्किल दोहरी है — अवमानना नोटिस के बीच बुलडोजर चलाना, और अपने ही प्रमुख का वेतन दांव पर होना। अदालत अब यह रिपोर्ट चाहती है कि जमीन खाली हो गई।