मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में अदालत ने केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता और सांसद संजय राउत की भूमिका और बयानों पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें पहले अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देने का कड़ा निर्देश दिया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों के 13 प्रमुख नेताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने और हेरफेर करने के कथित आरोपों की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा स्वतंत्र जांच (ऑडिट) कराने की मांग को लेकर यह याचिका दायर की है। इस याचिका में संजय राउत छठे नंबर के सह-याचिकाकर्ता हैं।
कोर्ट ने संजय राउत को लगाई फटकार; भागीदारी अनंतिम रूप से स्वीकार यह सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया:
संजय राउत को याचिकाकर्ता के रूप में केवल अनंतिम (Provisional) तौर पर स्वीकार किया जा रहा है।
अदालत के बाहर दिए गए उनके बयानों और आचरण पर संतोषजनक स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही उनकी याचिका पर अंतिम विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए कहा, "न्यायपालिका पर कोई दबाव नहीं बना सकता। हम किसी हाथीदांत की मीनार (Ivory Tower) में नहीं बैठे हैं; अदालत के बाहर कौन क्या बयान दे रहा है और अदालत में क्या दलीलें दी जा रही हैं, हम इस सबसे पूरी तरह वाकिफ हैं।"
माना जा रहा है कि राहुल गांधी और विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार किए जाने के बाद संजय राउत द्वारा मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका को लेकर मीडिया में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के संदर्भ में अदालत ने यह रुख अपनाया।
संजय राउत की प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए सांसद संजय राउत ने अपना पक्ष रखा:
"सुप्रीम कोर्ट देश के संविधान की रक्षा करने वाली सर्वोच्च संस्था है। अदालत की अवमानना करने का हमारा कभी कोई इरादा नहीं था। यदि शीर्ष अदालत को लगता है कि एक याचिकाकर्ता के रूप में मेरी ओर से कोई अनुचित टिप्पणी हुई है, तो संविधान की रक्षक इस सर्वोच्च संस्था से माफी मांगने में मुझे कोई संकोच नहीं है।"
विपक्ष की मुख्य मांगें क्या हैं? राहुल गांधी, संजय राउत और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिका में मुख्य मांगें शामिल हैं:
स्वतंत्र समिति द्वारा ऑडिट: मतदाता सूची के 'SIR' अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और विसंगतियों के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।
समय-सीमा तय करना: यह जांच और सत्यापन एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
इस याचिका के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है, वहीं अगली सुनवाई में संजय राउत द्वारा पेश किए जाने वाले स्पष्टीकरण पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं।