नई दिल्ली : वेब डेवलपमेंट में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली पीएचपी प्रोग्रामिंग भाषा में दो गंभीर खामियां मिलने के बाद भारतीय कंपनियों, खासकर छोटे और मझोले उद्योगों ने अपनी वेबसाइटें ठीक करने की मुहिम शुरू कर दी है।
इन खामियों से हैकर बिना लॉग-इन किए इंटरनेट से जुड़े सर्वर पर नियंत्रण कर सकते हैं, जिससे डेटा चोरी या दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर डाला जा सकता है। बताया जाता है कि भारत के .in डोमेन वाली करीब 67 फीसदी वेबसाइटें पीएचपी पर चलती हैं।
कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन) ने संस्थाओं से कहा है कि वे असुरक्षित सिस्टम की पहचान कर तुरंत नवीनतम सुरक्षा अपडेट लगाएं। खामियों को आधिकारिक पैच लगाकर ही बंद किया जाना चाहिए।
सरकार के मुताबिक, ज्यादातर अहम सार्वजनिक वेबसाइटों पर पैच लगा दिए गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये खामियां दस साल से ज्यादा समय तक छिपी रहीं। दुनिया भर में भी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने पीएचपी वर्जन इस्तेमाल करने वाली संस्थाएं सबसे ज्यादा खतरे में हैं। नियमित अपडेट न करना और कमजोर एक्सेस कंट्रोल जोखिम बढ़ाते हैं।
सर्ट-इन की सलाह है कि संस्थाएं तुरंत जांच कर असुरक्षित सिस्टम खोजें और पैच लगाएं। वेबसाइट चलाने वाले छोटे कारोबारों के लिए यह चेतावनी खास अहम है, क्योंकि उनके पास अक्सर अलग सुरक्षा कर्मचारी नहीं होता।
पुराने और अपडेट न किए गए सिस्टम पर ऐसी खामियों का खतरा ज्यादा होता है। पीएचपी वेबसाइटों के सर्वर अगर सीधे इंटरनेट से जुड़े हों तो हमलावर उन पर कब्जा कर सकते हैं। इसलिए वेब प्रबंधकों को पीएचपी का नया वर्जन, अपडेटेड प्लगइन और मजबूत एक्सेस कंट्रोल रखना चाहिए। संस्थाओं को विशेषज्ञों से सुरक्षा जांच कराने की सलाह भी दी जा रही है।