विशाखापत्तनम : पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए भारतीय नौसेना की संवेदनशील जानकारी लीक करने वाले बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। आंध्र प्रदेश के काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने यह कार्रवाई की और इसे 'ऑपरेशन फायरवॉल-2026' नाम दिया गया।
जांच में 18 प्रमुख संदिग्ध सामने आए, जिनमें 13 नौसेना से बताए जाते हैं। यह नेटवर्क आंध्र प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत 10 राज्यों में फैला था।
अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कोयंबटूर के आईएनएस अग्रणी में प्रशिक्षण ले रहे नौसेना के नाविक प्रदीप मुखर्जी और विशाखापत्तनम नौसेना तल पर अधिकारियों के लिए तैनात नागरिक अनुबंध चालक अन्नम साई वरप्रसाद शामिल हैं।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून की धारा 17 और 18 तथा आधिकारिक गोपनीयता कानून की धारा 3 के तहत केस दर्ज किए गए हैं।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आईएसआई के संचालकों ने सोशल मीडिया पर संवेदनशील नौसेना कर्मियों, अनुबंध कर्मचारियों और नागरिक अधिकारियों को चुनकर डिजिटल हनीट्रैप का इस्तेमाल किया। 'जोशिता पल्ल' और 'अन्वी मेहता' नाम से सक्रिय दो महिला एजेंट गिरफ्तार दोनों लोगों के सीधे संपर्क में थीं। इनके प्रोफाइल नकली हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाए गए होने के संकेत मिले हैं।
आईएसआई को जहाजों और पनडुब्बियों के आवागमन का शेड्यूल, संवेदनशील ठिकानों की फोटो-वीडियो, कमांडिंग अधिकारियों की जानकारी और वीडियो कॉल पर तलों की झलक जैसी जानकारी चाहिए थी। 2019 के 'ऑपरेशन डॉल्फिन्स नोज़' मामले से इस नेटवर्क की तरह की समानता बताई जा रही है।
जांच अधिकारियों ने बताया कि संदिग्धों ने मोबाइल फोन और अन्य सबूत नष्ट करने की कोशिश की। उनके बैंक लेनदेन और हवाला रूट की जांच की जा रही है। फोरेंसिक जांच से और जानकारी सामने आ सकती है और आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।