नई दिल्ली: देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार का जिक्र करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने गुरुवार को कहा कि 2029 तक यूजी और पीजी मिलाकर 75,000 अतिरिक्त मेडिकल सीटें बढ़ाने का लक्ष्य है और पिछले दो साल में 45,000 सीटें पहले ही बढ़ चुकी हैं.
नई दिल्ली में स्वास्थ्य क्षेत्र के एक सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में अब 23 एम्स हैं, पहले सिर्फ एक था. मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 863 हो गई है. यूजी मेडिकल सीटें 51,000 से 1.43 लाख और पीजी सीटें 31,000 से 86,000 हो गई हैं.
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के मुताबिक 2029 तक 75,000 और यूजी और पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने का लक्ष्य हम पूरा करेंगे," नड्डा ने कहा. उन्होंने कहा कि मकसद सिर्फ सीटें बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा देना भी है.
पीजी सीटों के विस्तार के लिए केंद्र ने प्रति सीट 1.5 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है. "सिर्फ इन पीजी सीटों के लिए 15,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं," उन्होंने कहा.
प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि देशभर में 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर बन चुके हैं. "अगर स्वास्थ्य सेवाओं को कुशल, सुलभ, आधुनिक और डिजिटल बनाना है, तो स्वास्थ्य सूचना प्रणाली बहुत जरूरी हिस्सा है," नड्डा ने कहा.
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मेडिकल शिक्षा का यह विस्तार पिछले एक दशक का सबसे बड़ा है. फिर भी ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है.
सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर को मेडिकल स्नातकों की अनिवार्य ग्रामीण सेवा पर संवैधानिक मार्गदर्शक सिद्धांत तय करने की इच्छा जताई थी. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और अलोक अराधे की बेंच ने कहा था कि स्वास्थ्य का अधिकार मूल अधिकार और राज्य का दायित्व है. मेडिकल शिक्षा के विस्तार के संदर्भ में यह फैसला अहम है.