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मुंबई की धूल पर वैक्यूम क्लीनिंग का मारा, मलबा ढोने वाले ट्रक ढकना ज़रूरी

मुंबई महानगर क्षेत्र की हवा प्रदूषण घटाने के लिए पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने स्वच्छ हवा कार्यक्रम का ऐलान किया है। सड़कों की धूल के लिए वैक्यूम क्लीनिंग मशीनें और मलबा ढोने वाले वाहनों को पूरी तरह ढकना जरूरी होगा। इसके लिए दिशानिर्देश अगले 15 से 20 दिनों में तैयार होंगे।

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मुंबई की धूल पर वैक्यूम क्लीनिंग का मारा, मलबा ढोने वाले ट्रक ढकना ज़रूरी

मुंबई : झाड़ू अब नहीं चलेगी। मुंबई की सड़कों से धूल हटाने के लिए सरकार वैक्यूम क्लीनिंग मशीनें, स्प्रिंकलर और एक सख्त नियम चाहती है — निर्माण मलबा ढोने वाला हर ट्रक पूरी तरह ढका हुआ ही चलेगा।

पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने मुंबई और आसपास की हवा प्रदूषण पर बैठक की अध्यक्षता करने के बाद यह फैसला बताया। मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए इसे एक ही स्वच्छ हवा कार्यक्रम के तहत लागू किया जाएगा, जहां निर्माण और पुनर्विकास जोरों पर हैं।

मुंडे ने कहा कि प्रदूषण में सबसे बड़ा हिस्सा सड़कों की धूल का है। झाड़ू लगाने से धूल बस एक किनारे हो जाती है, और वाहन उसे फिर हवा में उड़ा देते हैं। इसलिए नगर निगमों को वैक्यूम क्लीनिंग मशीनें खरीदनी होंगी, और स्प्रिंकलर से छिड़काव के लिए ताज़े पानी की जगह शोधित सीवेज पानी के इस्तेमाल पर विचार करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से स्कूल-कॉलेज के खुले मैदानों में भी धूल रोकने के उपायों की जांच करने को कहा।

मलबे का मामला ज्यादा पेचीदा है। निर्माण सामग्री और मलबा ढोने वाले ट्रक पूरी तरह ढके होने चाहिए। ट्रैफिक पुलिस को सिर्फ चालान काटकर छोड़ने की जगह वाहन को तब तक रोकने का निर्देश दिया गया है, जब तक वह नियम पूरा न करे।

मलबा कहां डालें, यह भी सिरदर्द है। मुंडे ने कहा कि कई नगर निकायों के पास जगह नहीं है। मीरा-भाईंदर में जगह की भारी कमी है, नवी मुंबई में एयरपोर्ट के आसपास निर्माण, औद्योगिक इलाकों के पुनर्विकास और हाईवे की ट्रैफिक से धूल की दिक्कत है, और कल्याण-डोंबिवली में रात में मलबा ढोने तथा मैंग्रोव इलाकों में डंप करने के मामले सामने आए हैं। वह चाहती हैं कि मुंबई, ठाणे और आसपास के निकाय उपलब्ध जमीन के साझा इस्तेमाल पर विचार करें और मलबे को प्रोसेस कर निर्माण में दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा दें।

इसके लिए दिशानिर्देश अगले 15 से 20 दिनों में बनाए जाएंगे। मुंडे ने कहा कि पनवेल, कल्याण और मुंबई नगर निगमों समेत संबंधित स्थानीय निकायों के साथ अलग-अलग बैठकें होंगी, ताकि उनकी दिक्कतें समझी जा सकें।

उद्योगों पर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडळ को ज्यादा बार निरीक्षण करने और यह जांचने का निर्देश है कि नियम सचमुच पाले जा रहे हैं या नहीं। बार-बार निरीक्षण के बाद भी न मानने वालों पर सख्त रुख होगा, लेकिन मकसद हर इकाई को बंद करना नहीं, जरूरी सुधार कराना है। कुछ औद्योगिक इलाकों में पुरानी मशीनरी और प्रक्रियाओं से प्रदूषण बढ़ रहा है, वहां स्थानीय हालात के हिसाब से अलग उपाय चाहिए।

बैठक में वाहनों का उत्सर्जन, ढुलाई के दौरान उड़ने वाली धूल और सड़क किनारे खड़े बेवारस वाहनों को हटाने पर भी चर्चा हुई, जिसके लिए परिवहन विभाग और पुलिस के बीच तालमेल जरूरी है। इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाना, सार्वजनिक परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसें और राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम के तहत मंजूर फंड का सही इस्तेमाल भी समीक्षा में आया।

मंडळ के सदस्य सचिव राहुल रेखावार ने अपने उपायों पर एक प्रेजेंटेशन दिया। पर्यावरण सचिव जयश्री भोज ने सभी विभागों से मंडळ के निर्देशों को सख्ती से लागू करने और तय फॉर्मैट में रिपोर्ट देने को कहा।

बैठक में भोज, रेखावार, परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर, बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकणे और पनवेल नगर आयुक्त मंगेश चितळे मौजूद थे। महानगर क्षेत्र के सभी नगर निगमों के आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े।