नई दिल्ली : भारतीय इंजीनियर देश में ही 2-3 नैनोमीटर चिप डिजाइन करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कही। वे 'ए वर्ल्ड बिटवीन ऑर्डर्स' विषय पर आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मोदी ने कहा कि भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों ने अब तक 325 से ज्यादा चिप डिजाइन किए हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिप डिजाइन के लिए प्रतिभा बढ़ाने हेतु सभी सुविधाएं दी जा रही हैं।
भारत सिर्फ बैक ऑफिस नहीं, ब्रेन ऑफिस की तरह भी काम कर रहा है, ऐसा मोदी ने कहा। उन्होंने कहा कि दुनिया के आधे से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) भारत में हैं। इन केंद्रों में अब सिर्फ सहायक काम नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग, विश्लेषण, उत्पाद विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का काम हो रहा है।
मोदी ने कहा कि एक साल में करीब 1.5 लाख पेटेंट दर्ज हुए और 70 लाख रोजगार बने। उन्होंने दोहराया कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है।
उन्होंने बताया कि दवा क्षेत्र की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत करीब 5,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और 40 से ज्यादा परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य छह करोड़ लखपति दीदी बनाने का है, ऐसा उन्होंने कहा।
मोदी ने यह भी कहा कि भारत ने जरूरत के वक्त 100 से ज्यादा देशों को टीके और दवाएं दीं। चिप डिजाइन में प्रगति को उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में भारत की बदलती भूमिका का उदाहरण बताया। सम्मेलन में उन्होंने भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप में अग्रणी देश है। उनके मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होने से दुनिया को समृद्धि का भरोसा मिलता है। दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सक्रिय दवा घटकों के उत्पादन में देश आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड और कंप्यूटिंग में आधुनिक चिप की भूमिका अहम है।