नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, आपदा राहत और अन्य आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों के लिए देशव्यापी समर्पित ब्रॉडबैंड नेटवर्क बनाने की तैयारी कर रहा है और इसके डिजाइन व तकनीकी ढांचे पर आम लोगों से सुझाव मांगे हैं।
प्रस्तावित नेटवर्क का नाम ब्रॉडबैंड पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ (BB-PPDR) है। मंत्रालय के मुताबिक इससे करीब 30 लाख कर्मियों को आपात स्थितियों में सुरक्षित और तेज संचार, आवाज, वीडियो और डेटा साझा करने की सुविधा मिलेगी।
इसमें मिशन क्रिटिकल पुश-टू-टॉक (MCPTT), मिशन क्रिटिकल डेटा और मिशन क्रिटिकल वीडियो जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। दायरे में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाएं तथा अन्य सार्वजनिक सुरक्षा एजेंसियां शामिल होंगी।
मंत्रालय ने अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों वाले 10 पायलट स्थान चुने हैं — अंडमान-निकोबार, अमृतसर, बस्तर, बेंगलूरू, गुवाहाटी, लद्दाख, लक्षद्वीप, मुंबई, रुद्रप्रयाग और विशाखापत्तनम। परीक्षण की विस्तृत समयसीमा नहीं बताई गई।
करीब 30 लाख हैंडसेट की जरूरत आंकी गई है, जिन्हें तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा — 21 लाख मजबूत फील्ड हैंडसेट, छह लाख वरिष्ठ अधिकारियों के लिए स्मार्टफोन श्रेणी के उपकरण और तीन लाख स्थिर या वाहन में लगने वाले उपकरण। बॉडी-वॉर्न कैमरों की संख्या तय नहीं हुई है।
मंत्रालय को 814-824 मेगाहर्ट्ज और 859-869 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम का सैद्धांतिक आवंटन मिला है, जो आम मोबाइल ब्रॉडबैंड से अलग आवृत्तियां हैं।