मुंबई : राकांपा में चल रहा असंतोष सोमवार को खुलकर सामने आ गया। पार्टी के छह वरिष्ठ नेता रविवार रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने गए थे। इसके बाद उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने मंगलवार शाम 7 बजे मुंबई के देवगिरी आवास पर विधायकों की बैठक बुलाई है।
अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को बारामती के पास विमान हादसे में निधन हो गया था। 31 जनवरी को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। वे राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं।
शाह से मुलाकात में प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबळ, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे और दिलीप वळसे पाटील शामिल थे। सुनेत्रा पवार या उनके बेटे पार्थ पवार इस बैठक में मौजूद नहीं थे।
पार्टी का कहना है कि यह मुलाकात पहले से तय थी। प्रवक्ता उमेश पाटील ने सुनेत्रा और पार्थ को अलग-थलग किए जाने की खबरों को "गलत, निराधार और भ्रामक" बताया। तटकरे ने कहा, "दिल्ली की बैठक पहले से तय थी, हमारे सभी नेता एकजुट हैं।" विलय पर उन्होंने कहा, "विलय की चर्चाएं पहले ही खत्म हो चुकी हैं।"
बताया जाता है कि शाह ने पार्टी के अंदरूनी मतभेद खत्म करने की सलाह दी।
विवाद की जड़ दो जगह है। पहला, वित्त और योजना विभाग। अजित पवार के पास रहा यह विभाग उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ले लिया और अब तक राकांपा को वापस नहीं दिया गया। दूसरा, पार्थ पवार के काम करने के तरीके से विधायकों में नाराजगी।
विवाद तब और बढ़ा जब पार्टी अपनी एकमात्र विधान परिषद सीट हार गई। शरद पवार गुट ने दो सीटें जीतीं।
सोमवार सुबह सुनेत्रा पवार की अध्यक्षता में हुई कोर कमेटी की बैठक में तय हुआ कि शरद पवार गुट के साथ विलय का सवाल ही नहीं है।
शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने पिछले महीने दावा किया था कि अजित पवार के निधन के बाद पार्टी का प्रभाव घटा है, इसीलिए वित्त विभाग वापस नहीं मिल रहा।
आज की बैठक में कितने विधायक पहुंचते हैं, इससे सुनेत्रा पवार की पकड़ का अंदाजा लगेगा, ऐसा राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है।