लेह: लद्दाख में एक निर्वाचित निकाय के लिए केंद्र के मसौदा प्रस्ताव में कहा गया है कि उपराज्यपाल अंतिम अधिकारी होंगे, और यह सवाल उठाया गया है कि इस निकाय के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन चुनाव प्राधिकरण करे या परिसीमन आयोग।
मसौदे में कई विकल्पों पर भी विचार किया गया है, जिनमें प्रस्तावित निकाय में एक-तिहाई या 50% तक सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना शामिल है। यह प्रस्ताव लद्दाख के लिए अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की लंबे समय से चली आ रही मांगों से जुड़ा है। लद्दाख 2019 में पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बाद केंद्रशासित प्रदेश बना।
लद्दाख में फिलहाल दो पहाड़ी विकास परिषदें हैं, लेह और कारगिल की लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदें। एपेक्स बॉडी लेह और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस समेत कई समूहों ने केंद्रशासित प्रदेश स्तर के निर्वाचित निकाय और छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपायों की मांग की है।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर मसौदे के सवाल बताते हैं कि सरकार ढांचा तय करने से पहले विकल्पों पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव केंद्र के उन पूर्व बयानों के बाद आया है जिनमें लद्दाख के लिए निर्वाचित व्यवस्था पर विचार की बात कही गई थी।
लद्दाख प्रशासन का प्रमुख उपराज्यपाल होता है। केंद्रशासित प्रदेश ढांचे के तहत निर्वाचित निकाय की शक्तियां उस कानून से तय होंगी जो इसे बनाएगा।
मसौदे ने क्षेत्र के राजनीतिक और नागरिक समाज समूहों का ध्यान खींचा है। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की कोई समयसीमा घोषित नहीं हुई है, और सरकार ने यह नहीं बताया कि निर्वाचित निकाय कब गठित होगा।