कोच्चि: एफआईआर दर्ज हो चुकी थीं। सोमवार को केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उन पर रोक लगा दी।
जस्टिस के नटराजन और जॉनसन जॉन की बेंच ने 9 अक्टूबर के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें एकल पीठ ने भ्रष्टाचार निरोधक विजिलेंस ब्यूरो को पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, बेटी वीणा टी और उनके पति पी ए मोहम्मद रियास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। बेंच ने विजिलेंस की ओर से दर्ज हुई एफआईआर और उसकी जांच पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी। मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
अपीलें स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि इन सवालों पर विस्तार से विचार जरूरी है।
9 अक्टूबर का निर्देश प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट पर आधारित था। ईडी ने पिछले महीने राज्य पुलिस को लिखकर एफआईआर मांगी थी, जिसके पीछे कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड के कथित भुगतानों की जांच और पीएमएलए के तहत हुई तलाशी में मिले सबूत थे। राज्य पुलिस ने एफआईआर के बजाय प्रारंभिक जांच करने का फैसला किया। अदालत के आदेश का पालन करते हुए बाद में दो एफआईआर दर्ज हुईं।
विजिलेंस की एफआईआर में आरोप है कि विजयन ने अपने पद का दुरुपयोग किया और भ्रष्ट तथा अवैध तरीकों से खुद, अपनी बेटी और उसकी कंपनी को आर्थिक लाभ पहुंचाया। एफआईआर के मुताबिक वीणा और उनकी बंद हो चुकी कंपनी एक्सालॉजिक सोल्यूशंस को सीएमआरएल और एम्पावर इंडिया कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स प्रा. लि. से बैंक खातों के जरिए ₹3.28 करोड़ मिले, जिसे आईटी परामर्श और मार्केटिंग सेवाओं के भुगतान के रूप में बताया गया।
ईडी ने अपीलों का विरोध किया। उसका तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट ने न विजिलेंस की एफआईआर पर रोक लगाई है और न उसके अपने मामले पर, इसलिए अंतरिम संरक्षण बनता नहीं।
प्रक्रिया का क्रम भी मायने रखता है। 15 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने विजयन, वीणा और रियास को एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। वे सुप्रीम कोर्ट गए, जिसने 21 अक्टूबर को विजिलेंस की जांच पर एक हफ्ते की रोक लगाई और उन्हें डिवीजन बेंच जाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की जांच पर रोक नहीं लगाई, और वह जांच चल रही है।
सोमवार शाम की स्थिति इस तरह बंटी हुई है। राज्य विजिलेंस का मामला रुका है। केंद्रीय मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं रुका। और जिस बेंच ने एक को रोका, उसने बाकी पर सोचने के लिए चार हफ्ते मांगे हैं।