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चेन्नीथला ने सख्त एनडीपीएस कानून की मांग की, अमित शाह को लिखा पत्र

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एनडीपीएस कानून में व्यापक बदलाव के लिए केंद्र-राज्यों की बैठक बुलाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन तूफान' में जब्ती से राज्य से बाहर और विदेश तक फैले नेटवर्क उजागर हुए हैं।

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तिरुवनंतपुरम: केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून को और सख्त बनाने की मांग की है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नशा-मुक्त भारत के लिए केंद्र व राज्यों की बैठक बुलाने का आग्रह किया है।

एक फेसबुक पोस्ट में मंत्री ने कहा कि उन्होंने शाह को बैठक के अनुरोध के साथ पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि राज्य में 'ऑपरेशन तूफान' नशा-रोधी अभियान के तहत जब्तियों से ऐसे व्यापक नेटवर्क उजागर हुए हैं जो केरल की सीमाओं से कहीं आगे और विदेशों तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा, "इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।"

चेन्नीथला ने कहा कि शाह से सभी राज्यों के गृह मंत्रियों की विशेष बैठक बुलाने का अनुरोध किया गया है, ताकि कानून के पूर्ण संशोधन और सख्त अनुवर्ती कदमों पर विस्तृत परामर्श हो सके, क्योंकि ड्रग माफिया "मौजूदा कानूनी ढांचे की खामियों का फायदा उठाकर खुलेआम काम कर रहा है"।

उन्होंने मौजूदा व्यवस्था की जिन कमजोरियों का जिक्र किया, वे हैं: बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों को छोटी इकाइयों में पैक करके बांटना, नए सिंथेटिक ड्रग्स का आना, फॉरेंसिक जांच में देरी का फायदा उठाना और 'बेनामी' खातों में धन छिपाना। उन्होंने कहा, "यह तथ्य कि गिरफ्तार लोग कानूनी खामियों का फायदा उठाकर आसानी से जमानत पा लेते हैं और फिर उसी तस्करी में लौट आते हैं, मौजूदा कानून की कमजोरी का सबूत है।"

मंत्री ने कहा कि हालात के लिए एनडीपीएस कानून में व्यापक बदलाव जरूरी है, ताकि दोहराए जाने वाले अपराधों के लिए कड़ी सजा मिले, और ड्रग माफिया के वित्तीय आधार को तोड़ने तथा उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए निर्णायक कार्रवाई हो।

उन्होंने कहा कि उन्होंने बैठक की मेजबानी के लिए केरल की तैयारी बताई है। अमृतपुरी में शाह से हुई हाल की मुलाकात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने 'ऑपरेशन तूफान' की प्रगति की सराहना की थी। चेन्नीथला ने कहा कि जांच में तालमेल मजबूत होने और कानूनी सुधार जल्दी लागू होने पर ही "मौत के सौदागरों" को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।