रांची : झारखंड के आपराधिक जांच विभाग (CID) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में OMR शीट हेरफेर, गोपनीय जानकारी की लीक और मेरिट की खरीद-फरोख्त मामले में पांच मुख्य आरोपियों के खिलाफ बुधवार शाम रांची की अदालत में पहला आरोपपत्र दाखल किया।
90 दिन की वैधानिक अवधि खत्म होने से ठीक पहले दाखल आरोपपत्र से गिरफ्तार आरोपियों के लिए 'डिफॉल्ट बेल' का रास्ता बंद हो गया। आरोपपत्र में तत्कालीन परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, एजेंसी 'टीडीपीएल' के निदेशक और घोटाले के मास्टरमाइंड रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी, तथा स्टाफ मो. उस्मान और मो. एबाद शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि अयोग्य उम्मीदवारों को पास कराने के लिए 'रेट कार्ड' तैयार किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए 5 लाख, मुख्य परीक्षा व साक्षात्कार में अंक बढ़ाने के लिए 10 से 15 लाख और अंतिम चयन के लिए 60 से 70 लाख रुपये की मांग की जाती थी।
गारंटी के तौर पर उम्मीदवारों से मूल शैक्षणिक दस्तावेज, कोरे चेक और कोरे कागज पर हस्ताक्षर लिए जाते थे। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट के मुताबिक OMR शीट जानबूझकर कोरी रखी गईं और बाद में स्कैनिंग प्रक्रिया व बैकएंड सर्वर में हेरफेर कर भरी गईं। गोपनीय उत्तर कुंजी आधिकारिक जारी होने से पहले व्हाट्सएप पर लीक हुई। बदले में तत्कालीन उप नियंत्रक और उनके परिवार के लिए दिल्ली व बेंगलुरु की हवाई टिकटें बुक की गईं। पहली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।
JPSC परीक्षाओं में गड़बड़ी से राज्य के हजारों ईमानदार उम्मीदवारों के करियर पर असर पड़ा है। CID अब अन्य संदिग्धों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखल करने की तैयारी कर रहा है। घोटाले से फायदा उठाने वाले उम्मीदवारों की भी जांच होगी। इस मामले ने परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।