कोलकाता: टिकट ₹1,800 से ₹12,000 तक का था। अब आरोपियों की सूची बढ़ रही है।
पश्चिम बंगाल के पूर्व सूचना एवं संस्कृति राज्यमंत्री और गायक इंद्रनील सेन को गुरुवार को 13 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। बुधवार शाम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर से बाहर निकलते ही कोलकाता पुलिस के जासूसी विभाग ने उन्हें हिरासत में लिया।
मामले का केंद्र महानिर्वाण रोड मास आर्ट सोसायटी है। 2021 में दुर्गा पूजा को यूनेस्को का अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा मिलने के बाद यह संस्था बनी। इसकी अध्यक्ष सेन की पत्नी मधुछंदा सेन हैं और सचिव ध्रुवज्योति बोस।
बोबाजार थाने में जयदीप मुखर्जी की शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने संस्था को यूनेस्को-प्रायोजित बताकर 2022 से 2025 के बीच आम लोगों से बड़ी रकम जुटाई। इन टिकटों से कोलकाता के 24 चुनिंदा पंडालों के 'प्रीव्यू शो' में एंट्री मिलती थी।
ईडी ने कहा कि जुटाया पैसा निजी फायदे में इस्तेमाल हुआ। सेन की कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खाते से करीब ₹30 लाख पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजे जाने की बात भी ईडी ने कही। सेन का कहना है कि यह रॉयल्टी थी।
ईडी के शुरुआती अनुमान के मुताबिक कुल गड़बड़ी ₹50 से 60 करोड़ की हो सकती है। 29 सितंबर को ईडी ने सेन से जुड़े 15 ठिकानों पर छापे मारे थे, जिनमें उनका कसबा स्थित घर भी था।
कोलकाता पुलिस के जासूसी विभाग के संयुक्त आयुक्त (अपराध) कुणाल अग्रवाल ने कहा, "हमने पाया कि उनके जरिए करोड़ों का लेनदेन हुआ, जिसका कोई स्पष्टीकरण वे नहीं दे सके।"
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत खारिज की थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, पर मंगलवार को न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता की पीठ ने निजी वजहों से खुद को सुनवाई से अलग कर लिया।
सेन और उनकी पत्नी ने आरोप नकारे हैं। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने जांच को राजनीति से प्रेरित बताया है। ₹30 लाख का भुगतान गानों और साहित्यिक कामों की कानूनी रॉयल्टी है और उसका उचित हिसाब व टीडीएस कटौती हुई है, ऐसा उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हालांकि दावा किया कि मामले में पूर्व मुख्यमंत्री की भी भूमिका हो सकती है।
सेन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सात धाराओं में केस दर्ज है। जांच जारी है।