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इंडिया ब्लॉक के दरवाजे: कांग्रेस ने वाईएसआरसीपी पर ठंडा रुख रखा, ममता चाहती हैं बड़ा दायरा

कांग्रेस ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के इंडिया ब्लॉक में शामिल होने की संभावना से इनकार कर दिया और पूर्व में भाजपा को समर्थन का हवाला दिया। वहीं सीपीआई (एम) ने जगन मोहन रेड्डी के रुख का स्वागत किया और तृणमूल कांग्रेस ने गठबंधन को और व्यापक बनाने की बात कही।

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के इंडिया ब्लॉक में शामिल होने की संभावना से इनकार कर दिया है। पार्टी आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की हाल की पहल पर संशय बनाए हुए है, हालांकि विपक्षी गठबंधन के कुछ घटकों ने उनके रुख को सकारात्मक माना।

विभिन्न मुद्दों पर ब्लॉक के साथ नजदीकी से जुड़े कांग्रेस के एक रणनीतिकार ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि जगन मोहन रेड्डी का कांग्रेस से कोई रिश्ता बन सकता है। अगर वे हमारा समर्थन करना या एसआईआर पर चिंता जताना चाहते हैं, तो हमें सतर्क रुख लेना होगा, क्योंकि उनकी पार्टी ने विधेयक पारित कराने में भाजपा का लगातार समर्थन किया और अप्रैल में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का भी समर्थन किया था।"

रणनीतिकार ने कहा कि रेड्डी शायद भाजपा के साथ अपनी स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, जो आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी के साथ गठबंधन में है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने कांग्रेस से अलग राय रखी। उन्होंने कहा, "बिना किसी ठोस आधार या सबूत के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और ईडी व सीबीआई पिंजरे के तोतों की तरह व्यवहार कर रही हैं। हम चाहते थे कि एनडीए के अलावा सभी वोट चोरी से जुड़े मुद्दे उठाएं। ऐसा नहीं कि हम इंडिया ब्लॉक में आएंगे, लेकिन हमें खुशी है कि वाईएसआरसीपी ने रुख अपनाया।"

तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजद, वाईएसआरसीपी और आप जैसी पार्टियों के साथ संवाद के रास्ते खुले रखे हैं, जिनके कांग्रेस से संबंध ठीक नहीं हैं। अपनी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस में बनर्जी ने कहा था कि इन पार्टियों के कांग्रेस के साथ राज्य स्तरीय मुद्दे हैं, लेकिन इंडिया ब्लॉक को इन आवाजों को शामिल करने के लिए व्यापक बनाया जाना चाहिए।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव अधिकारियों के मामले में रेड्डी पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया और कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति समर्थन राजनीतिक सुविधा पर निर्भर नहीं होना चाहिए।