नई दिल्ली : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर कानून बनाने के लिए सरकार आने वाले हफ्तों में परामर्श प्रक्रिया शुरू करेगी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा।
दुनिया की शीर्ष तीन-चार एआई परिस्थितिकियों में शामिल वैश्विक कंपनियों को देश के दायरे में काम करना होगा, उन्होंने कहा। मगर विधेयक का मसौदा कब तैयार होगा या परामर्श का नेतृत्व कौन-सा मंत्रालय करेगा, यह वैष्णव ने नहीं बताया।
केंद्र मानता है कि एआई पर और नियमन की जरूरत है, आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा। उन्होंने एआई एजेंट्स के सैंडबॉक्स से बाहर निकलकर अनियंत्रित हो जाने की कई साइबर घटनाओं का जिक्र किया। एजेंट जिन तरीकों से सिस्टम का फायदा उठाते हैं, उनमें कई बार बुनियादी साइबर स्वच्छता न अपनाए जाने की वजह होती है, वे बोले।
भारत में एआई नियमन की बहस मुख्य रूप से कॉपीराइट और आर्थिक प्रोत्साहनों पर केंद्रित रही है। हाल के फैसलों ने कॉपीराइट कानून और एआई डेवलपर्स की जरूरतों के बीच खींचतान दिखाई है। सरकार घरेलू एआई क्षमता और मुकाबला बढ़ाने में निवेश कर रही है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि नियामक ढांचे व्यापक आर्थिक लक्ष्यों और जनहित से मेल खाने चाहिए। उम्मीद है कि मसौदे से पहले उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिक समाज से राय मांगी जाएगी।
दुनियाभर में एआई एजेंट्स को लेकर चिंता बढ़ रही है; अमेरिका के कुछ बड़े बैंकों ने तीसरे पक्ष के एआई एजेंट्स को ग्राहक खातों में पहुंच रोक दी है, ऐसी खबरें हैं। दुनियाभर में एआई नियमन पर बहस बढ़ रही है और कई देश नए ढांचे बना रहे हैं।
भाजपा महाराष्ट्र के आईटी सेल प्रभारी तेजस मालवीय ने कहा, "केंद्र सरकार का यह निर्णय अत्यंत स्वागतयोग्य और समय की मांग है। एआई तकनीक के तेजी से हो रहे प्रसार को देखते हुए, साइबर सुरक्षा और नागरिकों के डिजिटल अधिकारों के संरक्षण के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा होना बेहद आवश्यक है। अनियंत्रित एआई मॉडल्स, साइबर अपराध और कॉपीराइट उल्लंघन जैसी चुनौतियों पर समय रहते अंकुश लगाकर भारत को वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित और विश्वसनीय तकनीकी केंद्र (Tech Hub) बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।"