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भ्रामक दावों पर एफएसएसएआई ने नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस को भेजी नोटिस

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस को उनके उत्पादों पर किए गए भ्रामक दावों को लेकर नोटिस भेजी है। प्राधिकरण ने गैर-अनुपालन वाले प्रचार पर भी ध्यान दिया है।

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नई दिल्ली: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस नाम की दो कंपनियों को उनके उत्पादों से जुड़े भ्रामक दावों पर नोटिस भेजी है।

प्राधिकरण खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावों और उनके प्रचार को लेकर नियमों के सख्त पालन के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है। बताया जा रहा है कि ये नोटिस गैर-अनुपालन वाले प्रचार से जुड़ी हैं।

स्वास्थ्य लाभ का भरोसा दिलाने वाले उत्पादों के दावे खासतौर पर चर्चा में रहते हैं। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दावे सबूतों पर आधारित न हों तो उपभोक्ता ठगे जाते हैं।

एफएसएसएआई पहले भी कई कंपनियों को ऐसी नोटिस भेज चुका है। नियमों के मुताबिक कंपनियों को तय समय में स्पष्टीकरण देना जरूरी होता है।

एक अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब खाद्य उत्पादों के दावों को ज्यादा बारीकी से पढ़ रहे हैं और सवाल पूछ रहे हैं। इससे कंपनियों पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ा है।

इन नोटिसों पर कंपनियों ने क्या जवाब दिया, यह अभी साफ नहीं हुआ है।

खाद्य उत्पादों पर दावों और विज्ञापनों को लेकर नियमों का पालन न होने पर प्राधिकरण दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकता है। उपभोक्ता संगठनों ने ऐसे दावों पर सख्त निगरानी की मांग की है। स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियों पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक दावों के साथ वैज्ञानिक प्रमाण देना कंपनियों के लिए अनिवार्य होना चाहिए। उपभोक्ताओं को उत्पादों के लेबल ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जा रही है।

खाद्य सुरक्षा कानून के मुताबिक उत्पादों पर किए गए दावे सच्चे और प्रमाण आधारित होने चाहिए। समय-समय पर नमूनों की जांच भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है। उपभोक्ता की शिकायत पर संबंधित उत्पादों की जांच की जाती है। प्राधिकरण ने साफ किया है कि नियम न मानने वाली कंपनियों पर कार्रवाई हो सकती है।