नई दिल्ली: भारतीय सर्टिफिकेट अथॉरिटी ई-मुद्रा के आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट से जुड़ी निजी चाबियां उजागर होने की बात सामने आई है। इन चाबियों को बनाते समय पर्याप्त रैंडमनेस नहीं रखी गई, जिससे ये सार्वजनिक सर्टिफिकेट से ही कोई भी निकाल सकता था।
मोज़िला की क्रिप्टोग्राफी टीम के सदस्यों के मुताबिक 17 अक्टूबर की शाम एक शोधकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई। इन चाबियों के जरिए हमलावर किसी भी वेबसाइट के लिए नकली पर भरोसेमंद सर्टिफिकेट बना सकता है और यूजर का डेटा चुरा सकता है।
क्रोम, फायरफॉक्स, एपल और माइक्रोसॉफ्ट ने कुछ ही घंटों में इन सर्टिफिकेट को ब्लॉक कर दिया। क्लाउडफ्लेयर ने भी अपने नेटवर्क पर आपात सुधार किए। गो प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के 1.27.3 और 1.26.10 संस्करण जारी कर इन चाबियों को अस्वीकार किया गया।
सुरक्षा शोधकर्ता स्कॉट हेल्मे ने कहा कि उन्होंने आठों निजी चाबियां अपने लैपटॉप पर एक सेकंड में निकाल लीं; इनमें एक चाबी '4' ही थी। बाकी चाबियां 256 से छोटे पूर्णांक थीं।
ई-मुद्रा ने बीएसई को बताया कि 30 अप्रैल 2025 की चाबी निर्माण प्रक्रिया में खामी के कारण साथ-साथ कमजोर चाबियां बनीं और वही ब्राउज़र के रूट स्टोर में प्रकाशित हुईं। कंपनी का ढांचा भेदा नहीं गया और कोई डेटा चोरी नहीं हुआ।
इन आठ सर्टिफिकेट में डोमेन-वैलिडेटेड, ऑर्गनाइजेशन-वैलिडेटेड, एक्सटेंडेड-वैलिडेटेड और कोड-साइनिंग श्रेणियां शामिल हैं। गो के सुरक्षा अपडेट के साथ एनएसएस, पायथन सर्टिफाई और होमब्रू जैसे प्रोजेक्ट्स ने भी सुधार किए। क्रोम अपने रूट स्टोर से संबंधित रूट हटा रहा है और यह बदलाव 27 अक्टूबर तक सभी डिवाइस तक पहुंचेगा।
ई-मुद्रा के सर्टिफिकेट सरकारी वेबसाइटों सहित कई सेवाओं में इस्तेमाल होते हैं। वैश्विक सर्टिफिकेट स्टोर ने घटना को गंभीरता से लिया है।