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क्रिप्टो से हजारों करोड़ का विदेशी लेनदेन? ED ने CoinDCX और Delta Exchange पर छापे मारे

विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के तहत ED ने बेंगलुरु में तीन जगहों पर छापे मारे. CoinDCX चलाने वाली नेब्लियो टेक्नोलॉजीज और Delta Exchange चलाने वाली एक्सेलियम टेक्नोलॉजीज से जुड़े ठिकानों पर 4 और 5 नवंबर को कार्रवाई हुई. दोनों कंपनियों ने नियमों के पालन का दावा किया है.

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बेंगलुरु: भारतीय रुपये में जमा पैसा स्टेबलकॉइन में बदलकर विदेशी एक्सचेंज पर भेजा जा रहा था? इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरू की है.

ED की बेंगलुरु शाखा ने 4 और 5 नवंबर को तीन ठिकानों पर छापे मारे. इस कार्रवाई की जानकारी निदेशालय ने 6 नवंबर को सोशल मीडिया पर दी. छापे विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (FEMA) 1999 की धारा 37 के तहत मारे गए.

कार्रवाई CoinDCX चलाने वाली नेब्लियो टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. और Delta Exchange India चलाने वाली एक्सेलियम टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. से जुड़े ठिकानों पर हुई.

निदेशालय की शुरुआती जांच के मुताबिक दोनों प्लेटफॉर्म क्रिप्टो टोकन में स्पॉट ट्रेडिंग, फ्यूचर्स और ऑप्शंस तथा विदेशी कंपनियों के टोकनाइज्ड शेयरों की ट्रेडिंग दे रहे थे.

स्पॉट सौदों पर आरोप है कि CoinDCX पर रुपये में जमा रकम USDT में बदलकर बाइनेंस, कुकॉइन और गेट.आईओ जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म पर भेजी जाती थी. ये लेनदेन कोस्टा रिका की एक कंपनी के खाते से निकाले जाते थे, ऐसा निदेशालय ने कहा. असल में ये सौदे CoinDCX ने अपने API से किए, ऐसा आरोप है.

फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर आरोप है कि CoinDCX ने विदेशी एक्सचेंज पर हर सौदे के मुकाबले पोजीशन खोली और ग्राहक के सौदे बंद होने पर वह विदेश में ही बंद की गई.

टोकनाइज्ड शेयरों के मामले में Apple, Google और Tesla जैसी कंपनियों के सौदे असल शेयरों के नहीं, बल्कि हाइपरलिक्विड नाम के विदेशी विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर डेरिवेटिव पोजीशन थे, ऐसा निदेशालय ने कहा.

इन सीमापार लेनदेन का आकार हजारों करोड़ रुपये बताया गया है. विदेशी प्लेटफॉर्म को USDT के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन शुल्क देने का भी आरोप है.

Delta Exchange India पर आरोप है कि उसके फ्यूचर्स-ऑप्शंस और टोकनाइज्ड स्टॉक सौदों का बड़ा हिस्सा CoinDCX के जरिए विदेशी एक्सचेंज पर भेजा जाता था और विदेशी सहयोगी कंपनियों को सैकड़ों करोड़ रुपये भेजे जाने की जांच चल रही है.

ये उत्पाद प्रतिभूति अनुबंध (नियमन) अधिनियम 1956, सेबी अधिनियम 1992 और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के प्रावधानों से प्रथमदृष्टया असंगत पाए गए, ऐसा निदेशालय ने कहा.

दोनों कंपनियों ने अपना पक्ष रखा है. CoinDCX ने कहा कि अधिकारियों ने 4 नवंबर को उनके बेंगलुरु दफ्तर का दौरा किया और कंपनी ने सहयोग किया. कंपनी FEMA 1999 समेत सभी भारतीय कानूनों का पालन करती है और KYC, AML व रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियां निभाती है. ट्रेडिंग, जमा और निकासी जारी है.

Delta Exchange ने कहा कि उनके काम में वर्चुअल डिजिटल एसेट का किसी भी रूप में सीमापार हस्तांतरण नहीं होता. वे सिर्फ भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए रुपये में सेटलमेंट वाला एक्सचेंज चलाते हैं. एक्सेलियम टेक्नोलॉजीज 2023 से FIU-IND के पास पंजीकृत है और उपयोगकर्ताओं का पैसा भारतीय बैंकों में सुरक्षित है.

जांच जारी है, ऐसा निदेशालय ने कहा.