नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के वोटर रोल में अब हर बदलाव की जांच होगी। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 10 अप्रैल को खत्म होने के बाद कंप्यूटर सहायकों के जरिए भरे गए फॉर्म 6 (पंजीकरण), फॉर्म 7 (नाम हटाना) और फॉर्म 8 (सुधार) से जोड़े, हटाए या बदले गए सभी नाम भारतीय चुनाव आयोग ने अनिवार्य जांच के दायरे में डाल दिए हैं। आदेश राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर लागू है।
यह कदम पिलभीत और आजमगढ़ समेत कई विधानसभा क्षेत्रों के रोल में गड़बड़ी मिलने के बाद उठाया गया। अधिकारियों का कहना है कि जिन मतदाताओं से संपर्क नहीं हो सका, उनके मामले में ये फॉर्म 'स्वत: तैयार' हो गए और उन पर अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर लग गए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को एक्स पर यह मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर में इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की जानकारी मांगने पर आयोग ने 'व्यापारिक रहस्य' कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख फॉर्म 6 आवेदनों का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिलभीत के रिकॉर्ड में 10,470 मतदाताओं से जुड़ी अनियमितता मिली है। अब पूरे राज्य में फॉर्म 6, 7 और 8 की जांच के आदेश दिए गए हैं। खरगे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार हर तरकीब लगा रही है।
आयोग के इस फैसले का मतलब यह है कि अब किसी मतदाता का नाम रोल से हटाना हो तो उसकी वजह दर्ज करनी पड़ेगी। मतदाता पंजीकरण नियमावली, 1960 के तहत कारण बताना जरूरी है।
कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान से 'सेव वोट्स-सेव द नेशन' मार्च और महारैली का ऐलान किया है। वोटर लिस्ट का विवाद अब अदालत से ज्यादा सड़क पर है।