नई दिल्ली: CBI आरोपों पर दूसरी नजर डालना चाहती थी। अदालत ने कहा कि इस सवाल पर फाइल बंद है।
विशेष न्यायाधीश संजीव कुमार मल्होत्रा ने एजेंसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पूर्व सीएमडी कपिल वधावन, पूर्व निदेशक धीरज वधावन और कारोबारी अजय रमेश नवंदर के खिलाफ आरोप बदलने की मांग की गई थी। मामला जून 2022 में CBI ने दर्ज किया था। आदेश 29 अक्टूबर का है।
एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने 17 बैंकों के कंसोर्टियम को 34,000 करोड़ रुपये का चूना लगाया। CBI इसे देश के सबसे बड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी मामलों में बताती है।
अदालत का तर्क अपनी ही शक्ति की सीमा पर टिका है। न्यायाधीश ने कहा, "यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह अदालत अपने आदेश की समीक्षा नहीं कर सकती, सिवाय क्लर्की या टाइपिंग की गलती सुधारने की सीमित हद तक।"
न्यायाधीश ने यह माना कि कोई पक्ष अदालत के संज्ञान में ऐसे तथ्य या सामग्री ला सकता है, जिससे आरोप जोड़ने या बदलने की जरूरत बन जाए। लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसा बदलाव मांगने का किसी पक्ष को अधिकार नहीं है, क्योंकि यह शक्ति सिर्फ अदालत के पास है।
ब्योरे पर अदालत ने कहा कि वह पहले ही तय कर चुकी है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 409 — लोक सेवक, बैंकर, व्यापारी या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात — कपिल और धीरज वधावन पर लागू नहीं होती।
अदालत को तीनों आरोपियों पर धारा 206 के तहत आरोप तय करने का सबूत भी नहीं मिला। यह धारा कुर्की या डिक्री की वसूली से बचाने के लिए संपत्ति को कपटपूर्ण ढंग से हटाने या छिपाने से जुड़ी है। इसी तरह धारा 424 के तहत भी आरोप तय करने का आधार नहीं मिला, जो बेईमानी से संपत्ति हटाने या छिपाने को कवर करती है।
अदालत ने सभी आरोपियों पर आपराधिक षड्यंत्र के मूल अपराध का आरोप तय करने से भी इनकार किया। उसने कहा कि वह सबूत पहले ही देख चुकी है और तय व्यक्तियों पर आरोप तय किए हैं।
विभिन्न दंड प्रावधानों के तहत 30 जुलाई को 104 आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे। उस चरण में पांच लोगों को बरी किया गया था।
CBI के लिए यह आदेश उस मामले में बची गुंजाइश कम करता है, जो एक बार आरोप तय होने की प्रक्रिया से गुजर चुका है। आरोपियों के लिए यह इस चरण पर नए आरोप जुड़ने की संभावना खत्म करता है। मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है।
अगला कदम मुकदमे की अदालत का कार्यक्रम है, इसी मुद्दे पर एक और अर्जी नहीं।