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दो बड़े एयरपोर्ट निजी हाथों में? लंबी लीज पर देने का विचार

चेन्नई और कोलकाता एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत लंबी लीज पर निजी कंपनियों को देने पर केंद्र सरकार विचार कर रही है. सेवाएं और ढांचा अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए यह कदम बताया जा रहा है.

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नई दिल्ली: चेन्नई और कोलकाता एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत लंबी लीज पर निजी कंपनियों को देने पर केंद्र सरकार विचार कर रही है. इन एयरपोर्ट की सेवाएं और ढांचा अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए यह विचार चल रहा है.

फिलहाल ये दोनों एयरपोर्ट सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियों द्वारा संचालित होते हैं. निजी भागीदारी से यात्री सुविधाएं, विस्तार और आधुनिकीकरण तेजी से होगा, ऐसी उम्मीद है.

देश के प्रमुख एयरपोर्ट के विकास और आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार पीपीपी मॉडल का इस्तेमाल करती आ रही है. इससे पहले कई एयरपोर्ट इसी तर्ज पर निजी भागीदारी में दिए गए हैं.

लेकिन निजीकरण से यात्री शुल्क बढ़ेगा या नहीं, और कर्मचारियों के हित कैसे सुरक्षित रहेंगे, जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं. प्रस्ताव का ब्योरा अब तक जारी नहीं हुआ है.

चेन्नई और कोलकाता दक्षिण और पूर्व भारत के अहम विमानन केंद्र हैं. इन एयरपोर्ट के विस्तार से यात्री यातायात बढ़ने की उम्मीद है.

प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होने पर केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी, ऐसा संबंधित सूत्रों ने बताया. देश भर में एयरपोर्ट क्षमता बढ़ाने की व्यापक कोशिशों का यह हिस्सा है, ऐसा भी सूत्रों ने कहा.

देश में एयरपोर्ट के निजीकरण से यात्री सुविधाएं सुधरने के उदाहरण हैं. लेकिन कुछ जगहों पर यात्री शुल्क बढ़ने की शिकायतें भी आई हैं. कर्मचारियों की सेवा शर्तों और हस्तांतरण पर स्थिति साफ होने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी. इन दोनों एयरपोर्ट से हर साल करोड़ों यात्री आवागमन करते हैं और इनका विस्तार लंबे समय से लंबित है.