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सीबीजी परियोजनाओं के लिए विशेष 'टास्क फोर्स' बनेगी; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश

महाराष्ट्र में कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए विशेष टास्क फोर्स बनेगी। इससे नगर निगमों का कचरा ढुलाई और निपटान पर होने वाला खर्च घटने की उम्मीद है।

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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

राज्य में बढ़ते शहरीकरण के साथ पैदा हो रही ठोस कचरे की समस्या हल करने और शहरों को कचरामुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कचरे से 'कंप्रेस्ड बायोगैस' (CBG) उत्पादन को गति देने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की सीबीजी नीति के अनुसार व्यावहारिक स्थानों पर ये परियोजनाएं तुरंत शुरू की जाएं।

मुख्यमंत्री के सरकारी निवास 'वर्षा' पर कचरामुक्त शहरों और सीबीजी परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में राज्य के प्रमुख महानगरों में कचरा प्रबंधन का नया मॉडल लागू करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

महानगरपालिकाओं का करोड़ों का खर्च बचेगा बैठक में मार्गदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में कचरे का निपटान स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन रहा है। सीबीजी परियोजनाओं से कचरे की ढुलाई और निपटान पर महानगरपालिकाओं का खर्च बड़े पैमाने पर घटेगा। इसके अलावा ये बातें भी रखी गईं:

स्थानीय तालमेल: कचरा संकलन, जमीन की उपलब्धता, उन्नत तकनीक और गैस पाइपलाइन की दूरी, इन घटकों का तालमेल बिठाकर ही परियोजनाओं की योजना बनाई जाए।

त्रिपक्षीय भागीदारी: स्थानीय स्वराज्य संस्थाएं (महानगरपालिकाएं), ऊर्जा और तेल कंपनियां तथा इस क्षेत्र की अनुभवी निजी संस्थाएं मिलकर अमल का तरीका तय करें।

मुंबई महानगर और औद्योगिक पट्टों पर विशेष जोर कचरे की समस्या की गंभीरता को देखते हुए मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और पुणे के प्रमुख औद्योगिक पट्टों में ये परियोजनाएं प्राथमिकता से लागू करने पर जोर दिया गया है:

एमएमआर क्षेत्र: बृहन्मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई के साथ वसई-विरार, मीरा-भाईंदर और कल्याण-डोंबिवली के लिए ठोस योजना तैयार करना।

पुणे क्षेत्र: तेजी से औद्योगिक हो रहे हिंजवडी आईटी पार्क और चाकण औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी परियोजनाओं की व्यवहार्यता जांचना।

'क्लस्टर मॉडल' और नागपुर पैटर्न का आधार बैठक के दौरान 'केवा ग्रीन' कंपनी की ओर से नागपुर में सफलतापूर्वक लागू किए गए कचरे से बायोगैस उत्पादन परियोजना की प्रस्तुति दी गई।

क्लस्टर पद्धति: एक ही शहर पर भार डालने के बजाय पास के छोटे-बड़े शहरों का समूह (क्लस्टर) बनाकर संयुक्त प्रसंस्करण परियोजना लगाई जा सकती है।

जमीन का कुशल उपयोग: शहर में कचरे का प्राथमिक वर्गीकरण (सेग्रीगेशन) करके मुख्य प्रसंस्करण केंद्र शहर के बाहर लगाया जाए, तो शहर की खुली जमीन पर दबाव कम होगा।

परिवहन लागत में बचत: तैयार गैस की ढुलाई आसान बनाने के लिए मुख्य गैस पाइपलाइन के पास परियोजना लगाई जाए, तो लॉजिस्टिक्स खर्च नाममात्र रह जाएगा।