मुंबई, 21 मई: राज्य की खेती, MSME क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों का सिर्फ मुनाफे पर नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी के भाव से काम करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से व्यापक नजरिया अपनाने और कृषि तथा फसल कर्ज वितरण को सबसे ज्यादा गंभीरता से लेने के निर्देश दिए।
ये निर्देश सह्याद्री अतिथिगृह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की 171वीं बैठक में बैंकों को दिए गए। बैठक में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे और मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल के साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी और SLBC के सदस्य भी मौजूद थे।
SLBC के मंच से वर्ष 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना जारी करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में कर्ज वितरण, फसल कर्ज, MSME क्षेत्र और किसानों के सामने मौजूद कई चुनौतियों पर विस्तार से अपनी राय रखी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस साल की वार्षिक ऋण योजना में कृषि सीजन से जुड़े कई अहम पहलू, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं, MSME क्षेत्र और ग्रामीण विकास शामिल हैं। हालांकि उन्होंने एक गंभीर चिंता की ओर ध्यान दिलाया। राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में वितरित कर्ज की रकम बढ़ रही है, लेकिन कर्ज खातों की संख्या लगातार घट रही है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “कर्ज वितरण बढ़ रहा है, लेकिन खातों की संख्या नहीं बढ़ रही। उलटा, यह घट रही है।” उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है और SLBC को इसे सुलझाने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी। वर्ष 2022-23 में राज्य में 61.15 लाख कर्ज खाते थे। यह संख्या 2023-24 में घटकर 56 लाख, 2024-25 में 54 लाख हो गई और 2025-26 में गिरकर सिर्फ 43 लाख रह गई। “61 लाख से 43 लाख तक की गिरावट गंभीर चिंता का विषय है। अब गहराई से सोचने का समय आ गया है कि आखिर गड़बड़ी कहां हो रही है।”
**सहकारी बैंक फसल कर्ज वितरण में राष्ट्रीयकृत बैंकों से आगे**
सहकारी बैंकों का फसल कर्ज वितरण राष्ट्रीयकृत बैंकों की तुलना में ज्यादा प्रभावी है, यह बताते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंक राज्य के 61 प्रतिशत खातों को कवर करते हैं और उनका प्रदर्शन 85 प्रतिशत है। इसके उलट, राष्ट्रीयकृत बैंक 26 प्रतिशत खातों को कवर करने के बावजूद सिर्फ 67 प्रतिशत प्रदर्शन कर पा रहे हैं। इसका मतलब है कि फसल कर्ज और मियादी कर्ज को लेकर राष्ट्रीयकृत बैंक अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। यह सोच बदलनी होगी। इस साल उन्हें कम से कम 80 से 85 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करनी होगी।
**किसानों को CIBIL स्कोर की शर्तों पर परेशान न किया जाए**
मुख्यमंत्री फडणवीस ने उन मामलों पर सख्त नाराजगी जताई जिनमें किसानों को CIBIL स्कोर के आधार पर फसल कर्ज लेने से रोका जा रहा है।
‘कर्ज का मौसम शुरू होते ही हर जिले से CIBIL स्कोर की शिकायतें आने लगती हैं। RBI ने साफ कर दिया है कि फसल कर्ज के लिए CIBIL स्कोर अनिवार्य शर्त नहीं है। फिर भी बैंक की शाखाएं अक्सर मुख्यालय के निर्देशों का बहाना बनाती हैं। इसलिए सभी बैंकों के मुख्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी करने होंगे कि फसल कर्ज के लिए CIBIL स्कोर की शर्त न लगाई जाए,’ उन्होंने आगे स्पष्ट किया।
**जिलावार प्रदर्शन पर चिंता**
मुख्यमंत्री ने बताया कि फसल कर्ज वितरण में सिर्फ दो जिले, सिंधुदुर्ग और धुले, अपने लक्ष्य का 90 से 100 प्रतिशत हासिल कर पाए हैं। रायगढ़, पुणे, सातारा, कोल्हापुर, नासिक, जलगांव, लातूर, अमरावती, चंद्रपुर और भंडारा 73 से 90 प्रतिशत के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि पालघर, रत्नागिरी, सांगली, नंदुरबार और नांदेड़ का प्रदर्शन अपेक्षा से कम रहा है, इसलिए इन इलाकों पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
**MSME क्षेत्र को लेकर चिंता**
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि MSME क्षेत्र में कर्ज देने में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन नए खातों की संख्या नहीं बढ़ रही। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की ‘तरुण’ श्रेणी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 15 लाख रुपये तक के कर्ज वाली इस श्रेणी में अब तक राज्य भर में सिर्फ 7,500 लाभार्थी हैं। इस श्रेणी में अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने की क्षमता है। इसलिए सभी बैंकों को इसके लिए अलग लक्ष्य तय करने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया गया।
**SLBC सिर्फ औपचारिकता न बने**
SLBC को सिर्फ सालाना बैठकों या छपी रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, यह कहते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने जोर दिया, “SLBC का असली फायदा राज्य के आर्थिक विकास में तभी दिखेगा, जब उसकी भावना और उद्देश्य जमीन पर ठोस कार्रवाई में बदलेंगे।” बैठक में उन्होंने अच्छा और कमजोर प्रदर्शन करने वाले, दोनों तरह के बैंकों के नाम सार्वजनिक रूप से घोषित करने की जरूरत भी बताई।
“बैंक सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं होते। वे देश की आर्थिक नीति का अहम हिस्सा हैं। इसलिए अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें और सक्रियता से काम करना होगा।” मुख्यमंत्री फडणवीस ने सभी बैंकों से अपील की कि वे राज्य के किसानों, उद्यमियों और आम नागरिकों तक कर्ज का लाभ पहुंचाने के लिए मिलकर काम करें।
**बैंक महिला किसानों, ग्रामीण उद्यमिता और वित्तीय समावेशन पर ज्यादा सक्रिय हों: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार**
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था देश की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और राज्य की आर्थिक वृद्धि को तेज करने में बैंकिंग क्षेत्र की अहम भूमिका है। उन्होंने वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण उद्यमिता पर खास जोर दिया। साथ ही, महिला किसानों के लिए अलग वित्तीय नीतियां बनाने की जरूरत बताई।

