मुंबई: छह साल पुराना बट्टे खाते डालना दरवाजे पर लौट आया है। यस बैंक को एक्सिस ट्रस्टीशिप से नोटिस मिला है, जिसमें मार्च 2020 में बट्टे खाते डाले गए ₹8,415 करोड़ के अतिरिक्त टियर-1 यानी एटी1 बॉन्ड बहाल और फिर सक्रिय करने की मांग की गई है।
नोटिस 28 अक्टूबर 2026 का है। यह उसके बाद आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें बट्टे खाते डालने को रद्द किया गया था। नोटिस के ब्योरे के मुताबिक ट्रस्टी ने बैंक को बॉन्ड बहाल करने के लिए तीन कार्यदिवस दिए हैं।
ट्रस्टी की मांग साफ है। उसने नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड में बट्टे खाते डालने की प्रविष्टियां उलटने और बीएसई तथा एनएसई पर बॉन्ड बहाल करने की मांग की है। उसने 9% और 9.5% एटी1 बॉन्ड पर बकाया कूपन भुगतान को लेकर स्पष्टता भी मांगी है, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का आकलन पूरा कर उसे लागू करने की समयसीमा बताने को कहा है।
साथ एक चेतावनी भी है। ट्रस्टी ने कहा है कि लागू करने में देरी हुई तो वह कानूनी विकल्प देख रहा है। अलग से उसने 16 नवंबर को बॉन्डधारकों की बैठक बुलाई है।
यस बैंक ने नोटिस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
ये बॉन्ड भारतीय बैंकिंग के सबसे विवादित प्रकरणों में से एक के केंद्र में हैं। एटी1 साधन नुकसान सोखने के लिए बनाए जाते हैं और उस बट्टे खाते डालने ने उन खुदरा और संस्थागत निवेशकों का पैसा मिटा दिया, जिन्होंने इन्हें कर्ज मानकर खरीदा था। अदालतों ने अब इस पर अलग राय दी है कि वह काम कैसे किया गया।
बाजार अपना फैसला दे चुका है। अक्टूबर में यस बैंक के शेयर करीब 26% गिरे और कई साल के निचले स्तर पर आए। शुक्रवार को शेयर करीब 1.5% गिरकर ₹15.20 पर बंद हुआ।
बॉन्ड बहाल करना सिर्फ बहीखाते का काम नहीं है। दोनों डिपॉजिटरी में प्रविष्टियां उलटने और दो एक्सचेंजों पर फिर सूचीबद्ध करने का मतलब है कि बैंक की पूंजी संरचना दोबारा बनानी होगी, और बकाया कूपन एक ऐसी देनदारी बन जाते हैं जिसका आंकड़ा तय करना पड़ेगा। बॉन्डधारकों के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कागज वापस आता है या नहीं, बल्कि यह भी है कि जो ब्याज कभी नहीं दिया गया, वह साथ आता है या नहीं।
बैंक के लिए समय कम है। 28 अक्टूबर के नोटिस से तीन कार्यदिवस नवंबर के पहले हफ्ते में खत्म होते हैं, और 16 नवंबर की बैठक दोनों पक्षों को एक तारीख देती है। बड़ा आंकड़ा वही है जो अभी किसी ने कागज पर नहीं उतारा: कूपन और किसी भी मुआवजे पर कितना खर्च आएगा।