भारतरत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर मनाया जाने वाला 'वाचन प्रेरणा दिवस' सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे साल के 365 दिनों में पढ़ने की प्रेरणा देनी चाहिए, मराठी भाषा मंत्री डॉ. उदय सामंत ने यह बात कही। उन्होंने मंत्रालय के हर अधिकारी और कर्मचारी से अपील की कि अगले 'वाचन प्रेरणा दिवस' तक वे कम से कम एक किताब पढ़ने का संकल्प लें।
मंत्रालय के त्रिमूर्ती प्रांगण में मराठी भाषा विभाग की ओर से आयोजित 'वाचन प्रेरणा दिवस' कार्यक्रम में वे बोल रहे थे। कार्यक्रम में भारतरत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की तस्वीर पर फूलमाला चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी गई। मंत्री ने मराठी भाषा विभाग की ओर से लगाई गई पुस्तक प्रदर्शनी और बिक्री केंद्रों का दौरा किया।
मराठी भाषा, साहित्य और पढ़ने की संस्कृति छात्रों तक पहुंचाई जाएगी
मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद मराठी भाषा विभाग ने इसकी समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक योगदान और पढ़ने की संस्कृति को छात्रों तक पहुंचाने के लिए एक खास पहल शुरू की। राज्य के विश्वविद्यालयों के छात्रों को मराठी का महत्व और उसकी शास्त्रीय विरासत समझाने वाली इस पहल को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। डॉ. सामंत ने कहा कि सिर्फ 10 दिन में करीब 10 लाख छात्रों तक पहुंचकर इसने नया रिकॉर्ड बनाया है।
पढ़ने की संस्कृति घटने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ 'वाचन प्रेरणा दिवस' मनाने से लक्ष्य पूरा नहीं होगा। पढ़ने की आदत रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बननी चाहिए।
मराठी पर गर्व बातचीत में भी दिखना चाहिए
विभाग के मराठी प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत करीब 1 लाख 67 हजार लोगों को मराठी का प्रशिक्षण दिया गया है। डॉ. सामंत ने उम्मीद जताई कि अगर मराठी बोलने वाले रोजमर्रा के कामकाज में मराठी में बात करने की आदत डाल लें, तो दूसरी भाषाओं के लोगों को मराठी सीखने के लिए अलग से प्रशिक्षण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
छत्रपति संभाजीनगर के एक ऑटोरिक्शा चालक का अनुभव याद करते हुए उन्होंने बताया कि रोजगार के लिए महाराष्ट्र आए और मराठी पर गर्व करने वाले उस चालक को शुरू में मराठी सीखने की जरूरत महसूस हुई थी। अगर मराठी यात्री उससे मराठी में बात करते, तो वह यह भाषा आसानी से सीख लेता। इसलिए उन्होंने हर व्यक्ति से अपनी रोजमर्रा की बातचीत में मराठी का इस्तेमाल बढ़ाकर शुरुआत करने की अपील की।
मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी
भारतरत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए डॉ. सामंत ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भाषा के प्रति प्रेम और मातृभाषा में पढ़ाई की नींव बचपन से ही डाली जानी चाहिए। डॉ. कलाम की राय थी कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक मातृभाषा का प्रभावी इस्तेमाल होना चाहिए।
उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री रहते हुए मराठी में तकनीकी शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराने की कोशिशें हुईं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी में बी.टेक. और एम.टेक. की पढ़ाई का विकल्प होना गर्व की बात है।
पढ़ने की आदत सिर्फ निजी विकास के लिए नहीं, समाज के बौद्धिक विकास के लिए भी जरूरी है। इसलिए डॉ. सामंत ने आने वाले साल में हर अधिकारी और कर्मचारी से कम से कम एक किताब पढ़ने का संकल्प लेने और पढ़ने की संस्कृति फैलाने में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम में नगर विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. के.एच. गोविंदराज, मराठी भाषा विभाग की सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी, उप सचिव डॉ. नामदेव भोसले और भाषा संचालनालय के संचालक अरुण गीते मौजूद थे।
मराठी भाषा विभाग की सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी ने पुस्तक प्रदर्शनी के आयोजन के पीछे की सोच समझाई। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य मकसद मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का किताबों से संपर्क बढ़ाना, उन्हें किताबें खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना और असल में पढ़ने को बढ़ावा देना था।
मराठी भाषा विभाग की ओर से लगाए गए पुस्तक प्रदर्शनी और बिक्री केंद्र 15 और 16 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मंत्रालय के त्रिमूर्ती प्रांगण में खुले रहेंगे। विभाग ने अधिकारियों, कर्मचारियों और आगंतुकों से प्रदर्शनी देखने और किताबें खरीदकर पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की है।

