लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) में बड़ी बगावत सामने आई है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चंदौली जिले के दर्जनों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे की घोषणा की है.
इन नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी अपने संस्थापक सिद्धांतों से भटक रही है और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है. टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए.
पार्टी के वाराणसी मंडल युवा विंग के महासचिव दीपक राजभर ने कहा कि 20 से 24 साल तक पार्टी बनाने वाले कार्यकर्ताओं को किनारे किया जा रहा है. "आंदोलन कर जिस समाज को सत्ता तक पहुंचाया, उसकी बुनियादी सुविधाएं अब भी अधूरी हैं," उन्होंने कहा.
इस्तीफा देने वालों में युवा विभाग अध्यक्ष और मंत्री के प्रतिनिधि बबलू राजभर भी शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 16 तारीख को अंबेडकरनगर में पदाधिकारियों ने संगठन की कमजोर स्थिति और सुधार की जरूरत पर चर्चा की, लेकिन उसके बाद नेतृत्व ने संपर्क नहीं किया.
इस्तीफा देने वालों के मुताबिक पार्टी बढ़ाने के लिए चंदा जुटाने और गांवों में प्रचार करने वाले कार्यकर्ताओं को नेतृत्व से मिलने का मौका भी नहीं मिला. प्रभावशाली लोगों पर ज्यादा ध्यान दिया गया.
2022 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में एसबीएसपी ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था. दीपक ने सवाल किया कि तब राजभर समाज के कितने उम्मीदवारों को मौका मिला. उन्होंने आशंका जताई कि 2027 में भी यही हाल हो सकता है. इस्तीफा देने वालों ने चेतावनी दी कि यह बगावत सिर्फ शुरुआत है और और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ सकते हैं.
एसबीएसपी राजभर समाज की प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, जो पहले समाजवादी पार्टी के साथ और बाद में एनडीए में रही. 2027 के चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारी के बीच यह बगावत सामने आई है. इस्तीफा देने वालों का कहना है कि संगठन खड़ा करने वाले कार्यकर्ताओं को फैसले लेने में जगह नहीं दी जाती.
इन आरोपों पर राजभर या एसबीएसपी नेतृत्व की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है.