नई दिल्ली : भारत में दूरसंचार उपकरण बेचने वाली कंपनियों को बताना होगा कि उनके उत्पाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहां लगा है। दूरसंचार नियामक ट्राई ने 30 अक्टूबर को जारी ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में यह शर्त रखी है।
ड्राफ्ट के मुताबिक लाइसेंसधारी दूरसंचार कंपनियां अपने नेटवर्क और सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली हर एआई प्रणाली के लिए जवाबदेह रहेंगी, चाहे वह खुद बनाई गई हो या खरीदी गई हो। बोर्ड से मंजूर नीति, जोखिम का वर्गीकरण और गंभीर एआई घटनाओं की सूचना नियामक को देने का ढांचा इसी में बनाना है।
ट्राई ने कहा है कि ये दिशानिर्देश सरकार के फरवरी 2026 में जारी भारत एआई गवर्नेंस दिशानिर्देशों को दूरसंचार क्षेत्र पर लागू करते हैं। नियामक के मुताबिक एआई नेटवर्क और सेवाओं में शामिल हो रहा है और इससे दक्षता बढ़ सकती है।
लेकिन खतरे भी हैं। ट्रेनिंग के दौरान पैदा होने वाला पूर्वाग्रह, मॉडल का भटकना और हमलावरों के हमले महत्वपूर्ण ढांचे की मजबूती को कमजोर कर सकते हैं, ऐसा ट्राई ने कहा।
ड्राफ्ट पर हितधारकों से 27 नवंबर तक लिखित सुझाव मांगे गए हैं। उसके बाद अंतिम दिशानिर्देश जारी होंगे।
दूरसंचार क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नेटवर्क की क्षमता सुधारने से लेकर ग्राहक सेवा तक कई जगह इसका उपयोग शुरू हो चुका है। लेकिन कौन सी प्रणाली क्या तय करती है और गलती होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी, यह साफ करने की मांग नियामकीय बहस में उठ रही थी।
ग्राहक के लिए इसका मतलब यह है कि अगर कोई एआई प्रणाली किसी ग्राहक को अलग दर, अलग सेवा या अलग फैसला देती है, तो उसका रिकॉर्ड और निगरानी कंपनी के पास रखना जरूरी होगा।