हैदराबाद: सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर की खींचतान अब विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही। मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के बीच के विवाद राज्य नेतृत्व और आईसीसी तक पहुंच गए हैं। सरकार अपने तीसरे साल में कदम रख रही है और पार्टी के नेता और कार्यकर्ता इस टकराव से परेशान हैं।
पिछले तीन साल तक गुटबाजी ज़्यादातर अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित थी। अब मंत्री बनाम मंत्री, मंत्री बनाम सांसद और मंत्री बनाम विधायक की शिकायतें सामने आने लगी हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी. महेशकुमार गौड़ और दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने मतभेद मिटाने की कई कोशिशें कीं, लेकिन नतीजा नहीं निकला, ऐसा सूत्रों ने बताया।
ताज़ा टकराव दिल्ली में हुआ। रामलीला मैदान में राहुल गांधी की सभा के सिलसिले में हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सी. दामोदर राजनरसिंहा और जुक्कल के विधायक लक्ष्मीकांत राव के बीच गाली-गलौज की खबर है। शिकायतें निपटाने के लिए गौड़ ने अलग बैठक बुलाई, पर दोनों नेता उससे गैरहाज़िर रहे। इसके बाद गौड़ ने अपनी रिपोर्ट आईसीसी भेजने का फैसला किया।
इससे पहले हैदराबाद में मल्लिकार्जुन खड़गे के हाथों तेलंगाना के इतिहास की किताब का विमोचन हुआ था। उस कार्यक्रम में बीआरएस से आए और भाजपा से आए विधायकों समेत करीब 15 विधायकों के नहीं पहुंचने की बात भी सामने आई है।
पार्टी के लिहाज से यह मौका ठीक नहीं है। दिसंबर 2023 में सत्ता मिलने के बाद सरकार तीन साल पूरे कर चुकी है और आगे स्थानीय चुनावों की तैयारी करनी है। अंदरूनी कलह से संगठन कमज़ोर पड़ता है, यह डर नेताओं को सता रहा है।
मंत्रियों और विधायकों की शिकायतों की सूची लंबी होती जा रही है। आईसीसी ने अब तक इस मामले में कोई साफ रुख नहीं लिया है। राज्य नेतृत्व को मिली रिपोर्ट पर अगली कार्रवाई तय होगी।