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नागपुर-अमरावती-कोंकण के लिए 4 दिन में पानी संकट प्लान; टैंकर बना 'आखिरी सहारा'

नागपुर, अमरावती और कोंकण डिवीजन के लिए पानी के संकट का गांव-वार कार्य-प्लान 25 अक्टूबर तक जमा करने का निर्देश, टैंकर को बताया आखिरी सहारा।

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नागपुर-अमरावती-कोंकण के लिए 4 दिन में पानी संकट प्लान; टैंकर बना 'आखिरी सहारा'

टैंकर पानी की आपूर्ति का आखिरी सहारा होना चाहिए, और उससे पहले गांव में क्या करना है, यह तय होना चाहिए। नागपुर, अमरावती और कोंकण डिवीजन में पानी के संभावित संकट का गांव-वार और तथ्यपरक कार्य-प्लान 25 अक्टूबर तक जमा करने का निर्देश जलापूर्ति और स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील ने दिया है। 25 अक्टूबर रविवार है, यानी समयसीमा सिर्फ चार दिन दूर है।

सह्याद्री अतिथिगृह में पाटील की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में तीनों डिवीजन की पेयजल योजनाओं, भूजल स्तर और अगले महीनों में पानी के संभावित संकट पर चर्चा हुई। इन इलाकों में अभी गंभीर पानी संकट नहीं है, यह बैठक में साफ हुआ, लेकिन आने वाले महीने देखते हुए प्रशासन को अभी से तैयार रहना होगा। अफसरों, जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और ग्राम पंचायतों से बात करके और सीधी जांच के आधार पर कार्य-प्लान बनाने को कहा गया।

जल जीवन मिशन में 75 से 99 फीसदी तक पूरी हो चुकी योजनाओं को पहले चालू करने को कहा गया है। आखिरी दौर में चल रही योजनाओं की पाइपलाइन, पंप, बिजली कनेक्शन और ट्रांसफार्मर जैसे अटके काम तुरंत निपटाने हैं। 75 फीसदी से ज्यादा प्रगति वाली योजनाओं की पैकेज संबंधी जानकारी पूरी कर सर्टिफाई करने को कहा गया, ताकि फंड बंटवारे में रुकावट न आए।

जिन गांवों में टैंकर लगने की नौबत आ सकती है, उनके लिए जलस्रोत मजबूत करने का अलग प्लान बनेगा। जिला नियोजन समिति के दो फीसदी फंड से स्रोत मजबूत करने के काम पहले हाथ में लेने हैं। इनमें कुआं रिचार्ज, खेत तालाब, सीमेंट चेक डैम, सीमेंट प्लग, लगातार समतल नाली और पुराने बांधों की मरम्मत शामिल है। जरूरत पड़े तो जिला नियोजन, खनिज और सीएसआर फंड से भी नियोजन करना है।

पानी की शिकायत आने या खबर छपने पर संबंधित अफसर तुरंत गांव पहुंचें और कार्रवाई करें। टैंकर से पहले मौजूद कुओं की सफाई और सैनिटाइजेशन, स्थानिक जलस्रोतों का पुनर्जीवन, पानी की सप्लाई की सही प्लानिंग और पानी की किफायती बरकत — ये उपाय करने हैं।

पूरी हो चुकी और सफल टेस्टिंग वाली योजनाएं जिला परिषद या ग्राम पंचायत को सौंपने की तय समयसीमा होगी। स्थानीय संस्थाएं योजना लेने में देरी करें तो सरकार की नीति के मुताबिक आगे की कार्रवाई होगी। योजनाओं का संचालन, बिजली बिल और रखरखाव की जिम्मेदारी जिला परिषद और ग्राम पंचायतों की होगी। बिजली कनेक्शन या ट्रांसफार्मर की दिक्कतें दूर करने के लिए अफसर जिलाधिकारी और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से तालमेल बिठाएं।

बैठक में तीनों डिवीजन के जल जीवन प्राधिकरण, डिवीजनल कमिश्नर, जिलाधिकारी, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अभियंता, भूजल सर्वेक्षण एवं विकास यंत्रणा के अफसर और जलापूर्ति विभाग के संबंधित अफसर मौजूद रहे।