चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने गुरुवार को सामाजिक न्याय सर्वे के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बहुसदस्यीय आयोग बनाने का फैसला किया।
बैठक सचिवालय में हुई और करीब डेढ़ घंटे चली। सरकार बनने के बाद यह तीसरी कैबिनेट बैठक थी।
पत्रकारों को जानकारी देते हुए ऊर्जा और कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने बताया कि सर्वे अगले साल कराया जाएगा। आयोग की नियुक्ति और उसका कार्यकाल क्या होगा, इसका ब्योरा उन्होंने इस बार नहीं दिया।
सामाजिक न्याय सर्वे राज्य की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय रहा है। किस समुदाय की आबादी कितनी है और शिक्षा तथा रोजगार में उनका हिस्सा कितना है, इसका ठोस आंकड़ा जुटाने के लिए ऐसे सर्वे का इस्तेमाल होता है। इसी आंकड़े के आधार पर आगे की नीतियां और आरक्षण का खाका तय होता है, ऐसी दलील इसके पक्षकार देते हैं।
विजय सरकार ने जून में पहली बैठक में 'वेत्री तमिलगम' विजन डॉक्यूमेंट पेश किया था। उस दस्तावेज की 436 कल्याणकारी योजनाओं और वादों को कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। उसी पृष्ठभूमि में अब सर्वे का फैसला हुआ है।
बैठक में कुछ और विषय भी उठे, ऐसा बताया गया। राजस्व विभाग में पोरंबोक (सरकारी) जमीनों को लेकर अहम फैसला और राजमार्ग विभाग की एक प्रमुख परियोजना को मंजूरी, इनमें शामिल होने की खबर है।
सर्वे का दायरा क्या होगा, उसमें जाति के हिसाब से जानकारी ली जाएगी या नहीं, आयोग में कितने सदस्य होंगे और वह रिपोर्ट कब देगा, इन सवालों के जवाब अभी नहीं आए हैं।
सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम के नेता और मुख्यमंत्री विजय ने बैठक में मंत्रियों को निर्देश दिए, ऐसा बताया गया — लोगों की जरूरतों को ही प्राथमिकता देनी है और उनकी मांगें पूरी करने में मंत्री आगे आएं।
राज्य में सत्ता बदलने के बाद प्रशासन में बड़े बदलाव हो रहे हैं, इसके संकेत पहले ही मिल चुके थे। गुरुवार का फैसला उसी क्रम की अगली कड़ी माना जा रहा है।